By अभिनय आकाश | Aug 29, 2026
मुंबई हाई कोर्ट में दिशा साल्यान मामले की जांच से जुड़ी याचिका पर अहम सुनवाई हुई। जस्टिस सारंग कोटवाल और जस्टिस भोसले की बेंच ने मामले से जुड़े कई सवालों पर सरकारी पक्ष से जवाब मांगा। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिशा के शव की स्थिति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटना स्थल से जुड़े सबूतों पर गंभीर सवाल उठा दिए। लोक अभियोजक शिशिर इहरे ने अदालत को बताया कि अस्पताल में तैयार किए गए पंचनामा में दिशा के शव पर कपड़े नहीं होने का जिक्र था। जिस पर अदालत ने पूछा कि कपड़े किसने हटाए और उससे जुड़े डॉक्टर का बयान क्यों दर्ज नहीं किया गया। हालांकि सरकारी पक्ष ने साफ किया कि यह घटना स्थल नहीं बल्कि अस्पताल का पंचनामा था। अदालत ने साफ कहा कि वह फिलहाल किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहते। कोर्ट के मुताबिक इस स्तर पर मर्डर या रेप की पुष्टि करना जरूरी नहीं बल्कि यह देखना महत्वपूर्ण है क्या जांच में संदेह पैदा करने वाली कोई परिस्थिति मौजूद है। सरकारी अभियोजकों ने अस्पताल से ली गई तस्वीरें भी पेश कर दी। तस्वीरों को देखकर अदालत ने चोटों को लेकर सवाल कर दिया। सरकारी पक्ष ने बताया कि ऊंचाई से गिरने के कारण दिशा के चेहरे, खोपड़ी और जबड़े में गंभीर चोटें आई थी। वहीं जांच में यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं मिलने का दावा किया गया। सरकारी पक्ष ने दिशा के पिता सतीश साल्यान, मां बसंती साल्यान और प्रेमी रोहन राय के बयानों का भी हवाला दिया।
बहस के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से उनके वकील ने दिशा सालियन के परिवार को लेकर भी अपनी बात रखी। पसबोला ने कहा कि दिशा के पिता और उनके परिवार के प्रति उन्हें पूरी सहानुभूति और संवेदना है। उन्होंने अदालत से कहा कि परिवार को इस मामले को खत्म करने का अधिकार मिलना चाहिए। हालांकि, उन्होंने साथ ही यह भी दलील दी कि एक युवा लड़की की दुर्भाग्यपूर्ण मौत को लेकर जिस तरह की राजनीति की जा रही है, उस पर अब कहीं न कहीं विराम लगना चाहिए। यानी आदित्य ठाकरे की ओर से अदालत में एक तरफ दिशा सालियन के परिवार के प्रति संवेदना जताई गई, तो दूसरी तरफ इस मामले को लेकर हो रही कथित राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाया गया।
दिशा सालियन की मौत की जांच से संबंधित याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में अब इस मामले में अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। फिलहाल, सुनवाई के दौरान आदित्य ठाकरे की ओर से मुख्य जोर इस बात पर रहा कि याचिका कानूनी और तथ्यात्मक आधार पर टिकाऊ नहीं है और दिशा सालियन की मौत को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।