जब बाबा साहब ने किया था संघ के शिविरों का दौरा, एक घंटे तक दलितों और उनके उत्थान पर की चर्चा

By लोकेन्द्र सिंह राजपूत | Apr 14, 2025

संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचारों में बहुत हद तक साम्य है। विशेषकर, हिन्दू समाज में काल के प्रवाह में आई अस्पृश्यता को दूर करने के लिए जिस प्रकार का संकल्प बाबा साहब के विचारों में दिखायी देता है, उसके दर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य में प्रत्यक्ष रूप से होते हैं। यही कारण है कि संघ और बाबा साहब प्रारंभ से, अप्रत्यक्ष रूप से एक-दूसरे के निकट रहे हैं। यह तथ्य बहुत कम ही सामने आया है कि डॉ. अंबेडकर ने संघ की शाखा एवं शिक्षा वर्गों में जाकर स्वयंसेवकों को संबोधित भी किया है और संघ के पदाधिकारियों से संघ कार्य की जानकारी भी प्राप्त की थी। इसलिए आज जब कहा जाता है कि बाबा साहब भी संघ की शाखा पर आए थे, तो लोग आर्श्चय व्यक्त करते हैं। परंतु, यह सत्य है। यह भी याद रखें कि संघ के प्रति बाबा साहेब के मन में कभी कोई दुराग्रह या नकारात्मक दृष्टिकोण नहीं रहा है। अवसर आने पर उन्होंने संघ के संबंध में सद्भाव ही प्रकट किए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ताओं एवं अधिकारियों के मन में भी बाबा साहेब के प्रति श्रद्धा का भाव है। संघ के कार्यकर्ता एकात्मता स्रोत में प्रतिदिन बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का स्मरण करते हैं।

सन् 1937 में करहाड शाखा (महाराष्ट्र) के विजयादशमी उत्सव पर बाबा साहब का भाषण हुआ। सन् 1939 में एक बार फिर बाबा साहब पुणे के संघ शिक्षा वर्ग के सायंकाल के कार्यक्रम में आए थे। यहाँ उनकी भेंट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक एवं तत्कालीन सरसंघचालक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से हुई। इस अवसर पर एक प्रेरणादायी प्रसंग घटित हुआ, जो आज में हमें दिशा देता है। वर्ग में शामिल स्वयंसेवकों के संबंध में जानकारी प्राप्त करते हुए बाबा साहब ने डॉ. हेडगेवार से पूछा- ‘इनमें अस्पृश्य कितने हैं?’ डॉ. हेडगेवार ने कहा- ‘चलो, घूम कर देखते हैं’। बाबा साहब बोले- ‘इनमें अस्पृश्य तो कोई दिख नहीं रहा’। डॉ. हेडगेवार ने कहा- ‘आप पूछ लें’। बाबा साहब ने पूछा- ‘आप में से जो अस्पृश्य हों, वे एक कदम आगे आ जाएं’। उस पंक्ति में से एक भी स्वयंसेवक आगे नहीं आया। बाबासाहब ने कहा- ‘देखा, मैं पहले ही कहता था’। इस पर डॉ. हेडगेवार ने कहा- ‘हमारे यहाँ यह बताया ही नहीं जाता कि आप अस्पृश्य हैं। आप अपनी अभिप्रेत जाति का नाम लेकर उनसे पूछें’। तब बाबासाहब ने स्वयंसेवकों से प्रश्न किया- ‘इस वर्ग में कोई हरिजन, मांग, चमार हो, तो एक कदम आगे आए’। ऐसा कहने पर कई स्वयंसेवकों ने कदम आगे बढ़ाया। उनकी संख्या सौ से ऊपर थी।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली शिक्षक विश्वविद्यालय में डॉ. बी आर अंबेडकर जयंती सप्ताह का आयोजन

सन् 1940 में भी बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर पुणे में संघ की शाखा में गए थे। यहाँ स्वयंसेवकों के समक्ष अपने विचार प्रकट किए। इस संबंध में हाल ही में विश्व संवाद केंद्र, विदर्भ ने 9 जनवरी 1940 को प्रकाशित प्रसिद्ध मराठी दैनिक समाचारपत्र ‘केसरी’ की प्रति साझा की है। केसरी में प्रकाशित समाचार के अनुसार, बाबा साहब ने संघ के स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा- “कुछ बातों पर मतभेद हो सकते हैं। लेकिन संघ की तरफ अपनत्व की भावना से देखता हूँ”। बाबा साहब के इस वाक्य से स्पष्ट है कि वे संघ के कार्य को अपना कार्य समझते थे। संभवत: उन्हें इस बात की प्रसन्नता रही होगी कि जिस काम को उन्होंने हाथ में लिया है, संघ के स्वयंसेवक उसे जमीन पर उतारने में बड़ा सहयोग दे रहे हैं।

बाबा साहब का संबंध संघ के साथ लंबे समय तक बना रहा। संघ पर लगे पहले प्रतिबंध को हटाने में बाबा साहब का जो सहयोग एवं परामर्श मिला, उसके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए तत्कालीन सरसंघचालक माधव सदाशिवराव गोलवलकर ‘श्रीगुरुजी’ ने सितंबर-1949 में बाबा साहब से दिल्ली में भेंट की। अर्थात् बाबा साहब डॉ. अंबेडकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का आपसी संपर्क-संवाद चलता रहा।

लोकेन्द्र सिंह

लेखक, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में सहायक प्राध्यापक हैं।

(इस लेख में लेखक के अपने विचार हैं।)

प्रमुख खबरें

Gold Rate को लगा तगड़ा झटका, चांदी ने पकड़ी रॉकेट सी रफ्तार, कीमतों में बड़ा फेरबदल

Gig Workers को अब मिलेगी Social Security, Zomato-Swiggy वालों को पूरी करनी होगी 90 दिन की शर्त

Suryakumar Yadav की एक गलती Mumbai Indians पर पड़ी भारी, RCB ने जीता सांसें थामने वाला Match

Varanasi में PWD का बड़ा एक्शन, Heavy Force की तैनाती के बीच Waqf संपत्ति पर चला Bulldozer