शेयर बाजार के बढ़ने या गिरने पर दिल का दौरा, स्ट्रोक और आत्महत्या से होने वाली मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा

By रितिका कमठान | Aug 03, 2024

चीन के फुडान विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक अध्ययन में बड़ी जानकारी सामने आई है। इस अध्ययन में पाया गया है कि शेयर बाजार में जितनी अधिक उथल-पुथल होने के कारण दिल के दौरे, स्ट्रोक और यहां तक ​​कि आत्महत्या से संबंधित मौतों की संख्या उतनी ही अधिक बढ़ जाती है। 
अध्ययन में दुनिया के दूसरे सबसे बड़े शेयर बाजार चीन में 2013 से 2019 के बीच 12 मिलियन से अधिक मौतों का विश्लेषण किया गया, जिसमें संस्थागत निवेशकों की तुलना में व्यक्तिगत निवेशकों का अनुपात विशेष रूप से अधिक था। एक महत्वपूर्ण चीनी शेयर सूचकांक में मात्र 1% की गिरावट, हृदयाघात और स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 0.74-1.04% की वृद्धि तथा आत्महत्याओं में 1.77% की वृद्धि के बराबर है।

हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक यह सिर्फ़ तब ही लागू नहीं होता जब बाज़ार गिरता है। यह तब भी लागू होता है जब बाज़ार अचानक से बढ़ता है। मगर बाजार बढ़ने की स्थिति में ये हालत काफी कम होती है। यह घटना पूरी तरह से बड़ी दुर्घटनाओं या उछालों के इर्द-गिर्द ही केंद्रित नहीं होती, बल्कि दैनिक उतार-चढ़ाव के दौरान भी होती है। 

बता दें कि सबसे अधिक असुरक्षित व्यक्तियों में पुरुष, 65-74 वर्ष की आयु के लोग तथा निम्न शिक्षा स्तर वाले व्यक्ति शामिल थे। शोधकर्ताओं ने मृत्यु का कारण अप्रत्याशित लाभ या धन हानि के कारण उत्पन्न तीव्र मनोवैज्ञानिक तनाव को बताया है, भले ही यह केवल कागज पर ही क्यों न हो, जिसके कारण रक्तचाप, हृदय गति और सूजन के स्तर में परिवर्तन हो सकता है, जिससे हृदय संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। शेयर बाजार में अस्थिरता का मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जिससे अक्सर चिंता और अवसाद की भावनाएं बढ़ जाती हैं और लोग आत्महत्या के विचारों की ओर बढ़ जाते हैं।

यह सब इस तथ्य के बावजूद है कि दिन-प्रतिदिन के बाजार में उतार-चढ़ाव जरूरी नहीं कि दीर्घकालिक वित्तीय स्थिति को परिभाषित करें। अध्ययन तनाव प्रबंधन तकनीकों को विकसित करने और स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने के लिए जब भी आवश्यक हो सहायता लेने के महत्व को रेखांकित करता है।

अध्ययन में शामिल सभी व्यक्ति आवश्यक रूप से प्रत्यक्ष रूप से शेयर बाजार में भागीदार नहीं थे, अध्ययन में शेयर बाजार के बाहर के अन्य कारकों को ध्यान में नहीं रखा गया है, इसमें व्यक्तियों की वित्तीय स्थिति का भी ध्यान नहीं रखा गया है, तथा चूंकि यह अध्ययन पूर्णतः चीन पर आधारित था, इसलिए इसमें अन्य देशों के साथ समानताएं पाई जा सकती हैं या नहीं भी पाई जा सकती हैं। 

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