Ambubachi Mela 2026: जब रजस्वला होती हैं देवी, जानें Ambubachi Mela का Divine रहस्य

By अनन्या मिश्रा | Jun 04, 2026

असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में हर साल अंबुबाची मेला लगता है। जोकि देश के सबसे आध्यात्मिक और रहस्यमयी मेलों में गिना जाता है। हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु, तांत्रिक, साधु-संत और पर्यटक इस पर्व का हिस्सा बनते हैं। बता दें कि इस मेले से एक प्राचीन रहस्य जुड़ा है। कामाख्या मंदिर को भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक जहां-जहां पर मां सती के शरीर के अंग गिरे थे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। इन्हीं शक्तिपीठों में कामाख्या देवी मंदिर भी शामिल है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अंबुबाची मेले के रहस्य और इसकी डेट के बारे में बताने जा रहे हैं।

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मेले से जुड़ा रहस्य

इस मेले से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यताओं में से एक ब्रह्मपुत्र नदी के जल का हल्का लाल दिखना है। भक्तों का विश्वास है कि यह परिवर्तन मां कामाख्या के रजस्वला होने का प्रतीक है। इसको देवी कामाख्या की दिव्य शक्ति का संकेत माना जाता है। इस वजह से इस अवधि को बेहद पवित्र और शक्तिशाली माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए, तो वैज्ञानिक खनिज तत्वों, मिट्टी और मानसून के दौरान पानी में आने वाले प्राकृतिक बदलावों को बताते हैं। लेकिन इसके बाद भी श्रद्धालुओं के लिए यह घटना सिर्फ प्राकृतिक नहीं बल्कि मां कामाख्य की अलौकिक उपस्थिति और आशीर्वाद का प्रतीक है।

आस्था की भीड़

इस मेले में हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि प्रशासन काफी पहले से इस मेले की तैयारियों में लग जाता है। सरकार ने साल 2026 में लगने वाले मेले की तैयारियां भी अभी शुरू कर दी हैं। वहीं इस मेले के लिए सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और नए मार्गों की योजना पर काम किया जा रहा है। जिससे कि इस मेले में शामिल होने वाले भक्तों को किसी तरह की परेशानी का समाना न करना पड़े।

जो लोग तंत्र साधना, आध्यात्मिक अनुभव और भारतीय संस्कृति की अनोखी परंपराओं को बेहद करीब से देखना चाहते हैं। तो उनके लिए अंबुबाची मेला एक अद्भुत अनुभव साबित हो सकता है। 

अंबुबाची मेला सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं बल्कि स्त्री शक्ति और प्रकृति के सम्मान का जीवंत संदेश भी देता है।

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