Ashadha Gupt Navratri 2023: कब शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि? जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

By डॉ अनीष व्यास | Jun 09, 2023

हिंदू पंचांग के अनुसार पहली गुप्त नवरात्रि आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाई जाती है। इस बार यह तिथि 19 जून से शुरू होकर 28 जून तक मनाई जाएगी। इस गुप्त नवरात्री के अवसर पर 10 महाविद्याओं की पूजा की जाती है। यह समय महाकाली एवं भगवान शिव यानी कि शाक्त और शैव की पूजा करने वालों के लिए विशेष माना जाता है। तंत्र साधक इस दौरान विशेष साधनाएं करते हैं। इस बार आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि में कई विशेष योग बन रहे हैं। जिससे इस नवरात्रि का महत्व और भी बढ़ गया है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष नवरात्रि को गुप्त नवरात्रा कहा जाता है। इन नवरात्रों में 10 महाविद्याओं की पूजा करने का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है। गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा-अर्चना की जाती है। इसी कारण गुप्त नवरात्रि का पर्व हर कोई नहीं मनाता है। इस समय की गई साधना जन्मकुंडली के समस्त दोषों को दूर करने वाली तथा चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम और कोक्ष को देने वाली होती है। इसका सबसे महत्वपूर्ण समय मध्य रात्रि से सूर्योदय तक अधिक प्रभावशाली बताया गया है। आषाढ़ माह में पड़ने वाली नवरात्रि को भी गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। इस दौरान प्रतिपदा से लेकर नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। गुप्त नवरात्रि में साधक महाविद्याओं के लिए खास साधना करते हैं। 

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आषाढ़ गुप्त नवरात्रि तिथि

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 18 जून 2023 को सुबह 10:06 बजे से शुरू होगी और अगले दिन 19 मई 2023 को सुबह 11:25 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि उदया तिथि मान्य होती है इसलिए गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जून से होगी।

प्रतिपदा तिथि का आरंभ– 18 जून 2022, सुबह 10:06 मिनट

प्रतिपदा तिथि का समाप्ति- 19 जून 2022, सुबह 11:25 मिनट

कलश स्थापना शुभ मुहूर्त

कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि की पूजा के लिए कलश की स्थापना का शुभ मुहूर्त सोमवार 19 जून 2023 को प्रात: काल 05:23 मिनट से 07:27 मिनट तक है। इसके अलावा इस दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:55 मिनट से लेकर दोपहर 12:50 मिनट बजे तक है। इस मुहूर्त में भी कलश स्थापना की जा सकती है।

घट स्थापना मुहूर्त- 19 जून 2022, प्रात: काल 05:23 मिनट से 07:27 मिनट तक

अभिजित मुहूर्त- 19 जून 2022, सुबह 11:55 मिनट से लेकर दोपहर 12:50 मिनट बजे तक। 

10 महाविद्याओं की साधना 

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ दस महाविद्या की भी पूजा की जाती है। 

मां काली मां तारा मां त्रिपुर सुंदरी मां भुवनेश्वरी मां छिन्नमस्ता मां त्रिपुर भैरवी मां धूमावती मां बगलामुखी मां मातंगी मां कमला

गुप्त नवरात्रि की तिथियां

प्रतिपदा तिथि- घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा

द्वितीया तिथि- मां ब्रह्मचारिणी पूजा

तृतीया तिथि- मां चंद्रघंटा की पूजा

चतुर्थी तिथि- मां कूष्मांडा की पूजा

पंचमी तिथि- मां स्कंदमाता की पूजा

षष्ठी तिथि- मां कात्यायनी की पूजा

सप्तमी तिथि- मां कालरात्रि की पूजा

अष्टमी तिथि- मां महागौरी की पूजा

नवमी तिथि- मां सिद्धिदात्री की पूजा

दशमी- नवरात्रि का पारण

गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा को लगाएं भोग

प्रतिपदा- रोगमुक्त रहने के लिए प्रतिपदा तिथि के दिन मां शैलपुत्री को गाय के घी से बनी सफेद चीजों का भोग लगाएं। 

द्वितीया- लंबी उम्र के लिए द्वितीया तिथि को मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाएं। 

तृतीया- दुख से मुक्ति के लिए तृतीया तिथि पर मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं। 

चतुर्थी- तेज बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए चतुर्थी तिथि पर मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं। 

पंचमी- स्वस्थ शरीर के लिए मां स्कंदमाता को केले का भोग लगाएं। 

षष्ठी- आकर्षक व्यक्तित्व और सुंदरता पाने के लिए षष्ठी तिथि के दिन मां कात्यायनी को शहद का भोग लगाएं। 

सप्तमी- संकटों से बचने के लिए सप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करें। 

अष्टमी- संतान संबंधी समस्या से छुटकारा पाने के लिए अष्टमी तिथि पर मां महागौरी को नारियल का भोग लगाएं। 

नवमी- सुख-समृद्धि के लिए नवमी पर मां सिद्धिदात्री को हलवा, चना-पूरी, खीर आदि का भोग लगाएं। 

गुप्त नवरात्रि में करते हैं विशेष साधना

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ अनीष व्यास ने बताया कि आषाढ़ की गुप्त नवरात्रि का तंत्र-मंत्र और सिद्धि-साधना के लिए विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि तंत्र मंत्र की सिद्धि के लिए इस समय की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है। इस नवरात्रि में मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, माँ ध्रूमावती, माँ बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी की पूजा की जाती है।

- डॉ अनीष व्यास

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

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