Trump को टैरिफ का आइडिया मिला कहां से? 40 साल पुरानी ट्रेड वॉर की कहानी, Reciprocal Tariffs कैलकुलेट करना का क्या है पूरा गणित

By अभिनय आकाश | Apr 03, 2025

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के रेसिप्रोकल टैरिफ बम ने दुनिया भर में खतरे की घंटी बजा दी है, यहां तक ​​कि एक निर्जन द्वीप जहां केवल पेंगुइन और सील रहते हैं। उन्हें भी टैरिफ से नहीं बख्शा जा रहा है। इससे इतर रिपब्लिकन का साफ कहना है कि हमने उन देशों पर टैरिफ लगाया है जिन्होंने दशकों तक अमेरिका को लूटा है। डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा अन्य देशों पर लगाए जाने वाले बहुप्रतीक्षित रेसिप्रोकल टैरिफ 10 प्रतिशत की आधार रेखा से शुरू होकर लगभग 50 प्रतिशत तक जाएँगे। डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने कथित तौर पर विदेशी देशों पर शुल्क की गणना के लिए एक नई पद्धति के साथ देशों पर पारस्परिक शुल्क तय किया, टैरिफ दरों और व्यापार बाधाओं के मिलान पर अपने पिछले फोकस से हटकर मुख्य रूप से व्यापार संतुलन पर आधारित मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया। सरल शब्दों में, ट्रम्प का रेसिप्रोकल टैरिफ फॉर्मूला पूरी तरह से व्यापार घाटे को एड्रेस करता है। 

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ट्रंप के टैरिफ वॉर का आइडिया कहां से आया

1990 के दशक में डोनाल्ड ट्रंप की किस्मत साथ नहीं दे रही थी और उन्हें नगदी की जरूरत आन पड़ी। इसके बाद मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जापान के अमीरों को लुभाने के लिए एशिया की यात्रा पर निकल पड़े थे। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा था कि कोई बिजनेसमैन अपने प्रोजेक्ट के लिए जापानी अरबपतियों की मदद मांग रहा हो। ट्रंप को ये साफ दिख रहा था कि कैसे 1980 के दशक में जापानी निवेशक मशहूर रॉकफिलर समेत अमेरिकी ब्रांड और संपत्तियों के अधिग्रहण का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। ये वही पल था जब अमेरका  साथ व्यापार और संबंधों के लिए ट्रंप का नजरिया तैयार हुआ।  ये तब भी दिखा जब आयात पर लगाए जाने वाले टैरिफ पर अपना ध्यान देना शुरू किया। ट्रंप को लगा कि अमेरिका को अपने सहयोगी जापान को सैन्य सहायता प्रदान करने के बदले पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है।  उस समय उद्योगपति ट्रंप ने कहा था कि मैं दूसरे देशों को अमेरिका का फायदा उठाते देखकर थक गया हूं। ये बात ट्रंप ने 1980 के दशक में सीएनएन के पत्रकार के साथ एक इंटरव्यू के दौरान की थी। कई लोग इस बात को ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के शुरुआती इरादे के रूप में देखते हैं। ओपरा विनफ्रे के साथ लाइव टॉक में ट्रंप ने कहा था कि वो अमेरिकी विदेश व्यापार नीति को अलग तरीके से संभालेंगे। देश के सहयोगियों से सही कीमत वसूलेंगे। 

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किस देश पर कितना टैरिफ लगेगा ये ट्रंप प्रशासन ने कैसे किया तय?

व्हाइट हाउस से जारी बयान में यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) ने टैरिफ तय करने की नई पद्धति के बारे में बताया।  ब्लूमबर्ग द्वारा किए गए यूएसटीआर के विश्लेषण के अनुसार, यह फॉर्मूला किसी देश के संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ ट्रेड सरप्लस पर आधारित है। 2024 के लिए अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के डेटा का उपयोग करके इसे उसके टोटल एक्सपोर्ट से डिवाइड किया गया है। फिर इसके रिजल्ट को डिस्काउंटेड टैरिफ रेट बनाने के लिए आधा कर दिया गया है। उदाहरण के लिए, पिछले साल अमेरिका के साथ चीन का ट्रेड सरप्लस 438 बिलियन डॉलर के एक्सोप्ट पर 295 बिलियन डॉलर था,। इसे कैलेकुलेट करने पर 68 प्रतिशत का रेसियो आता है। नए फॉर्मूले के अनुसार, इसे दो से डिवाइड करने पर 34 प्रतिशत की टैरिफ दर का आंकड़ा निकलता है और चीन पर अमेरिका ने यही लगाया है। इसी मेथड को जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय संघ सहित अन्य देशों पर भी लागू किया गया है। हालांकि कुछ राष्ट्रों पर एकसमान 10 प्रतिशत टैरिफ दर लागू की गई है। ये वो देश हैं  जिनके साथ अमेरिका का बैलेंस ट्रेड है। 

ट्रंप के टैरिफ से भ्रम की स्थिति

टैरिफ फॉर्मूला, जो डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा से पहले काफी हद तक अज्ञात था। तब और भ्रम की स्थिति पैदा कर दी जब ट्रंप द्वारा जारी की गई दरें उनके कार्यकारी आदेश के साथ संलग्नक में सूचीबद्ध दरों से थोड़ी भिन्न थीं। उदाहरण के लिए, ट्रंप के पोस्टर पर दक्षिण कोरिया की दर 25 प्रतिशत दिखाई दी, लेकिन आधिकारिक दस्तावेज़ में 26 प्रतिशत दिखाई दी। यही स्थिति भारत के साथ भी थी, जिसकी दरें ट्रंप के पोस्टर पर 26 प्रतिशत थीं, लेकिन व्हाइट हाउस के दस्तावेज़ों में 27 प्रतिशत दिखाई दीं। ट्रम्प ने पहले संकेत दिया था कि टैरिफ में प्रत्यक्ष टैरिफ दरों और गैर-टैरिफ बाधाओं, जैसे करों और मुद्रा हेरफेर दोनों को शामिल किया जाएगा। 


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