By अभिनय आकाश | May 05, 2026
35 साल से एक नेता का अपनी सीट पर दबदबा कायम है। चुनाव आते रहते हैं। वो जीतता रहता है। फिर एक हीरो आता है और सारा गेम पलट जाता है। हीरो से इंस्पायर होकर एक ऑटो ड्राइवर चुनावी दंगल में उतरता है। इस बार जनादेश नेता को छोड़ इस ऑटो ड्राइवर के साथ आ खड़ा होता है। एक आम आदमी की यह जीत लोकतंत्र का जश्न बन जाती है। यह सुनने में किसी फिल्मी कहानी सा लग सकता है। मगर ये सोलह आने सच है। तमिलनाडु में जब डीएमके और एआईडीएमके जैसी पार्टियों के वोटों में सेंध लगती है तो चर्चा सिर्फ उन्हें हराने वाली पार्टी की नहीं होती। थलापति विजय की टीवीके ने रॉयपुरम सीट पर टिकट एक ऑटो ड्राइवर को दिया और वो ऑटो ड्राइवर अब खुद हीरो बन गया है। रॉयपुरम को एआईएडीएमके नेता जय कुमार का गढ़ माना जाता है। 1991 के बाद से पांच बार विधायक रह चुके जय कुमार के इस गढ़ में के विजय धामू ने सेंध लगा दी। धामू ने अपने खाते में 55,000 से ज्यादा वोट गिराए। जय कुमार इस बार दूसरे स्थान पर भी नहीं टिक सके।
सूत्रों के मुताबिक, विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कज़गम (टीवीके) ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात का समय मांगा है ताकि सरकार गठन पर चर्चा की जा सके। पार्टी ने शानदार शुरुआत करते हुए 108 सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत से 10 सीटें कम रह गईं, जिसके चलते सरकार बनाने के लिए चुनाव के बाद गहन बातचीत शुरू हो गई। सूत्रों ने बताया कि विजय नवनिर्वाचित विधायकों से मिलने के लिए सुबह 10 बजे टीवीके कार्यालय के लिए रवाना होंगे। सभी 234 निर्वाचन क्षेत्रों में मतगणना पूरी होने के बाद, टीवीके ने 108 सीटें हासिल कीं। एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (डीएमके) 59 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) 47 सीटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। छोटे दलों को मामूली सीटें मिलीं, जिनमें कांग्रेस को पांच और पट्टाली मक्कल काची को चार सीटें प्राप्त हुईं। मात्रा से कम रहने के बावजूद, टीवीके का मजबूत प्रदर्शन तमिलनाडु में एक बड़ी राजनीतिक सफलता है, जिससे विजय सरकार गठन के प्रयासों के केंद्र में आ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, टीवीके ने बहुमत के अंतर को पाटने के लिए संभावित सहयोगियों से संपर्क साधते हुए "प्लान बी" को सक्रिय कर दिया है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस और पीएमके टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन करने के लिए तैयार हैं, और दोनों दल बातचीत के तहत दो-दो मंत्री पद मांग रहे हैं। इस बीच, वामपंथी दल आंतरिक विचार-विमर्श कर रहे हैं, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं ले पाए हैं।