By अभिनय आकाश | Jul 18, 2026
अमेरिका में रूसी तेल खरीदने पर 100% टैरिफ लगाने वाले बिल को भारी समर्थन मिल रहा है। 60 से ज्यादा अमेरिकी सेनेटर्स के एक ग्रुप ने इस बिल का सपोर्ट कर दिया है। यह कानून उन देशों पर 100% टेरिफ लगाएगा जो रूस के कच्चे तेल और नेचुरल गैस खरीदना जारी रखते हैं। यह रूसी फंडिंग को रोकने के लिए अब तक के सबसे सख्त अमेरिकी कदमों में से एक है। 60 से सिनेटर्स की ओर से मंजूरी मिलने के बाद इस बिल के पास होने की संभावना बहुत ज्यादा हो चुकी है। इस बिल के पास होने के बाद भारत, चीन, अज़रबैजान, हंगरी जैसे देशों पर रूसी तेल खरीद के कारण 100% टेरिफ लागू हो जाएगा। इस बिल को सेनेटर लिंसे ग्राहम ने तैयार किया था। जिनका इसी हफ्ते यूक्रेन से लौटने के बाद अचानक निधन हुआ। हालांकि यह बिल अमेरिका के यूरेनियम इंपोर्ट और उन यूरोपीय सहयोगियों को छूट देता है जो अभी भी सीमित मात्रा में रूसी गैस खरीदते हैं। यह बिल 15 यूरोपीय खरीदारों को छूट देता है।
इस बिल का खास टारगेट चीन और भारत को ही माना जा रहा है। यह बिल सीधे रूस से इंपोर्ट होने वाले सामान पर 500% तक टेरीफ लगाने का अधिकार भी देते हैं। इसके साथ ही इसमें क्रिमिनल के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व उसके बड़े बैंकों और रूस के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस से जुड़ी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाने का प्रावधान देते हैं। इस बिल का दायरा बहुत बड़ा है। फिर भी रूस से यूरेनियम खरीदने के प्रतिबंधों से यह साफ तौर पर छूट देता है। तो एक तरफ अमेरिका और यूरोप के लिए तमाम तरह के छूट के प्रावधान इस बिल में कर दिए गए हैं। अलग-अलग सेक्शंस के जरिए अब रास्ता निकाल दिया गया है कि अमेरिका रूस से इनरिचड यूरेनियम खरीद पाए। वहीं यूरोप के देश गैस ले पाए लेकिन भारत और चीन जैसे देश तेल ना लेने पाए। यह साफ तौर पर दोहरा मापदंड दिखाता है। इस बिल पर अभी तक भारत की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन अमेरिका का यह रवैया बताता है कि वो विश्वसनीय बिल्कुल भी नहीं है और रूस से दोस्ती की सजा भारत और चीन को देना चाहता है।