By नीरज कुमार दुबे | Nov 26, 2024
संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो चुका है। दोनों सदनों का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के जिस तरह के तेवर दिखाई दे रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि संसद का यह शीत सत्र राजनीतिक रूप से गर्म बना रहेगा। देखा जाये तो सरकार ने इस सत्र के लिए जो विधायी कामकाज तय किया है वह तो किसी ना किसी तरह पूरा हो जायेगा लेकिन चिंता इस बात की है कि जनता के असल मुद्दों का क्या होगा? देश के सामने ऐसी कई ज्वलंत समस्याएं हैं जिन पर संसद में चर्चा होना बहुत जरूरी है। देश के समक्ष कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर संसद में चर्चा कर उनका निराकरण करना बहुत जरूरी है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या विपक्ष संसद को चलने देगा ताकि जनता के मुद्दों का हल निकल सके। सवाल उठता है कि क्या विपक्ष संसद को चलने देगा ताकि सांसद जो विषय संसद में उठाने के लिए अपनी तैयारी करके आये हैं उनको मौका मिल सके?
बहरहाल, देश के समक्ष कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर संसद में चर्चा कर उनका निराकरण करना बहुत जरूरी है। क्या हैं वह प्रासंगिक मुद्दे और भारत कैसे उनके चलते हो रहा है प्रभावित, इस बारे में उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता और भारत के पीआईएल मैन के रूप में विख्यात अश्विनी उपाध्याय ने कई बड़ी बातें कही हैं।