तेरे लिए ले लेंगे, सब से दुश्मनी...भारत-चीन को 'मेन कल्प्रिट' बता US ने कौन सा बिल किया पास, रूस से दोस्ती की भारी कीमत चुकाएगा हिंदुस्तान?

By अभिनय आकाश | Jul 29, 2026

अमेरिकी सीनेट ने 8612 के भारी बहुमत से जिस रूस सेक्शन बिल को मंजूरी दी उसमें एक ऐसा क्लॉज़ यानी धारा है जो भारत पर 100% टेरिफ लगाने का रास्ता साफ कर देता है। दरअसल वाशिंगटन के कैपिटल हिल में जब वोटिंग हो रही थी तो माहौल काफी भावुक और तनावपूर्ण था। यह बिल सेनेटर लिंडसे ग्राहम का ड्रीम प्रोजेक्ट था। लिंडसे ग्राहम जो यूक्रेन के सबसे मुखर समर्थकों में से एक थे। अब विडंबना देखिए जिस दिन ग्राहम का अंतिम संस्कार हो रहा था। ठीक उसी दिन सीनेट ने उनके द्वारा तैयार किए गए इस बिल को पास कर दिया। रिचर्ड जो ग्राहम के साथ इस बिल पर काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मरने से ठीक एक दिन पहले ग्राहम ने इस डील को बिग इफिंग डील कहा था। जेलस्की भी एक्स पर पोस्ट कर इसे ग्राहम की विरासत को बता रहे हैं। अब जेलस्की के लिए जीत बड़ी है क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि इससे रूस को फंड मिलना बंद हो जाएगा।

इसे भी पढ़ें: खेतों से शुरू हुआ कूटनीतिक युद्ध ग्लोबल मार्केट तक पहुंचा, WTO में भयंकर भिड़े भारत-अमेरिका

उन्होंने आगे कहा साफ़-साफ़ कहें तो, इस मामले में चीन और भारत ही मुख्य दोषी हैं। वे सबसे ज़्यादा तेल और गैस खरीदते हैं, रूस की युद्ध मशीन को बढ़ावा दे रहे हैं और दुनिया में कहीं भी हमें कोई फ़ायदा नहीं पहुंचा रहे हैं। मंगलवार को सीनेट ने 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ़ 2026' को आगे बढ़ाने के लिए 'क्लोचर मोशन' पर 86-12 से वोट किया। यह वोटिंग साउथ कैरोलिना के उस सीनेटर को आखिरी विदाई देने के कुछ घंटों बाद हुई, जिनका 11 जुलाई को निधन हो गया था। यह वोटिंग यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के वॉशिंगटन दौरे के कुछ घंटों बाद हुई, जहाँ वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिले और मॉस्को के खिलाफ़ सख़्त कार्रवाई की मांग की। ज़ेलेंस्की ने ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हिस्सा लिया, जो कांग्रेस में कीव के सबसे मुखर सहयोगियों में से एक थे।

इसे भी पढ़ें: कोयला आवंटन केस में मनमोहन सिंह पर सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला आ गया? ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त

क्या भारत रूस पर अपनी निर्भरता को 15% से नीचे ले जा सकता है?

भारत के विदेश मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के लिए यह समय बहुत चुनौतीपूर्ण है। अब इसके कुछ मुख्य पॉइंट्स हैं। पहला है नेगोशिएशंस। क्या भारत ट्रंप प्रशासन को यह समझाने में सफल होगा कि उसकी ऊर्जा जरूरतें किसी युद्ध को बढ़ावा देने के लिए नहीं बल्कि अपने 140 करोड़ से ज्यादा की जनता के विकास के लिए है। दूसरा है सप्लाई चेन में बदलाव। क्या भारत रूस पर अपनी निर्भरता को 15% से नीचे ले जा सकता है? फिलहाल यह नामुमकिन जैसा लगता है और तीसरा काउंटर टेरिफ। क्या भारत भी अमेरिकी सामानों पर जवाबी कारवाई करेगा? इससे एक ट्रेड वॉर यानी व्यापार युद्ध छिड़ सकता है जो दोनों देशों के लिए नुकसानदेह होगा। खैर जेलस्की ने अमेरिकी सेनेटरों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा यह न्यायपूर्ण प्रतिक्रिया है। लेकिन भारत जैसे विकासशील देश के लिए जो अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने की कोशिश कर रहा है कि न्याय काफी महंगा पड़ सकता है। वाशिंगटन में बदलती हुई हवाएं और सीनेट का यह फैसला भारत अमेरिकी संबंधों की एक नई कहानी लिखने वाला है। 

प्रमुख खबरें

गोवा में नीट विरोध प्रदर्शन का स्तर बौद्धिक रूप से काफी नीचे गिरा: मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत

हरियाणा के नूंह में जीवित समाधि का करतब दिखाते समय 27 वर्षीय युवक की दम घुटने से मौत

अभिनेता Ram Charan कलाई की सफल सर्जरी के बाद पत्नी उपासना संग Ayyappa Temple पहुंचे

Travel Tips: मानसून सीजन में बना लें तमिलनाडु के इन 5 हिल स्टेशंस का प्लान, हमेशा कि लिए यादगार बन जाएगी ट्रिप