Chai Par Sameeksha: Bengal, Assam, Tamilnadu, Kerala Elections में किस पार्टी का पलड़ा भारी है?

By अंकित सिंह | Jan 05, 2026

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में हमने 2026 में देश में अलग-अलग राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी। हमने नीरज दुबे से सबसे पहला सवाल पश्चिम बंगाल को लेकर पूछा पश्चिम बंगाल को लेकर नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि देखा जाये तो पश्चिम बंगाल की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। तृणमूल कांग्रेस आज सत्ता की थकान और आत्मसंतोष की शिकार दिख रही है। स्थापना दिवस के भाषणों में संघर्ष की बातें जरूर हैं, लेकिन उन शब्दों में वह धार नहीं दिखती जो कभी ममता बनर्जी की पहचान हुआ करती थी। दुष्ट ताकतों का जिक्र दरअसल अपनी कमजोरियों से ध्यान हटाने का प्रयास अधिक लगता है। लंबे समय तक सत्ता में रहने का बोझ अब तृणमूल पर साफ दिखने लगा है। भ्रष्टाचार के मामलों, संगठनात्मक ढीलापन, जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष और जनता के रोजमर्रा के सवालों से कटाव ने पार्टी को रक्षात्मक बना दिया है। मां माटी मानुष का नारा आज भी दोहराया जा रहा है, लेकिन मानुष के मन में उठ रहे सवालों के ठोस जवाब तृणमूल के पास नहीं दिखते।

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पश्चिम बंगाल के अलावा हमने असम तमिलनाडु केरल पर भी चर्चा की। असम को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां एकतरफा मुकाबला नजर आ रहा है। हिमंत बिस्वा सरमा की पकड़ बहुत मजबूत है। इतना ही नहीं, हिमंत बिस्वा सरमा जबरदस्त तरह की राजनीति करते हैं और साफ तौर पर वह सामाजिक समीकरणों को साधने में कामयाब हुए हैं। नीरज दुबे ने यह भी कहा कि हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य के हिंदू ही नहीं, बल्कि स्थाथी मुसलमान भी पसंद करते हैं जो असम के रहने वाले हैं। उनके लिए हिमंत बिस्वा सरमा लगातार मजबूती से काम करते रहे हैं। वहीं, कांग्रेस में अभी भी गठबंधन को लेकर कंफ्यूजन है। साथ ही साथ कांग्रेस जमीन पर काम करती हुई दिखाई नहीं दे रही है।

तमिलनाडु को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि इस बार वहां सियासत जबरदस्त तरीके से हो रही है। हां, यह बात सही है कि सत्ता में रहते हुए डीएमके इस वक्त काफी मजबूत दिखाई दे रही है। हालांकि, एआईएडीएमके के गठबंधन से डीएमके को बड़ी चुनौती की उम्मीद है। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि तमिलनाडु में 10 सालों से एमके स्टालिन की सरकार है। ऐसे में उनकी सरकार के खिलाफ नाराजगी जबरदस्त तरीके से कई बार हमें देखने को मिली है। इतना ही नहीं, भ्रष्टाचार के आरोप उनकी सरकार पर लगे हैं। ऐसे में एआईएडीएमके के और भाजपा का गठबंधन वहां कुछ खास कर सकता है। हालांकि नीरज दुबे ने यह भी कहा कि एआईएडीएमके के जो पुराने नेता है, उनको साथ लिया जाए तो वहां मुकाबला एकतरफा भी हो सकता है। केरल को लेकर नीरज दुबे ने कहा कि वहां यूडीएफ और एलडीएफ की लड़ाई है। भाजपा की लोकप्रियता बढ़ी जरूर है लेकिन अभी इतनी ज्यादा नहीं है कि वहां सरकार बन सके। 

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