चेहरे की किताब के अनसुने पन्ने हुए उजागर, विभिन्न देशों की राजनीति को प्रभावित करने के साथ ही हेट स्पीच को भी बढ़ावा देता है फेसबुक

By अभिनय आकाश | Oct 05, 2021

चेहरे की किताब यानी फेसबुक जिसके जरिए हम दोस्तों से जुड़े रिश्तेदारों से जुड़े। एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफार्म जहां आप पोस्ट या फोटोज डालकर ये बता सकते हैं कि क्या कर रहे हैं, क्या सोच रहे हैं। इसके सबसे ज्यादा यूजर भारत में हैं। फेसबुक के जरिए हमें दोस्तों का रिश्तेदारों का और खबरों का भी हाल पता चलता है। यूं तो दुनियाभर में फेसबुक और उसके दोनों प्लेटफॉर्म व्हाट्सअप और इंस्टाग्राम का जलवा है। लेकिन भारत में इनकी लोकप्रियता चौंकाने वाली है। तीनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने बीते डेढ़ दशक के भीतर खास मुकाम हासिल किया है। लेकिन बीते दिन फेसबुक और उसके दोनों प्लेटफॉर्म के ठप्प होने की खबरें सुर्खियों में रही। जिसकी वजह से ट्विटर पर लोगों की खूब प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। लेकिन इन सब बातों से इतर आज बात इससे आगे की करेंगे। एक खुलासे की करेंगे जिसने फेसबुक की विश्वसनियता को एक बार फिर सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। 

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कौन हैं फेसबुक पर खुलासा करने वाली हॉगेन

फ्रांसेस हॉगेन 37 वर्ष की एक डेटा साइंटिस्ट हैं। जिनके पास कंप्यूटर इंजीनियरिंग में डिग्री और व्यवसाय में हार्वर्ड मास्टर डिग्री है। 15 वर्षों तक उन्होंने Google और Pinterest जैसी कंपनियों के लिए काम किया है। उनका कहना है कि मैंने सोशल नेटवर्क का एक समूह देखा है और यह फेसबुक पर पहले की तुलना में काफी खराब था।

पैसा कमाने को दी अहमियत

फ्रांसेस हॉगेन ने दावा किया कि फेसबुक ने हमेशा अपने यूजर्स की सुरक्षा से ज्यादा प्रॉफिट को अहमियत दी। 2021 की दूसरी तिमाही तक फेसबुक के लगभग 2.8 बिलियन एक्टिव यूजर्स थे। 60 मिनट के होस्ट स्कॉर्ट पेले से बात करने हुए वो कहती हैं कि लोगों के लिए क्या अच्छा था और फेसबुक के लिए क्या अच्छा था। इन दोनों को लेकर संघर्ष था और फेसबुक ने खुद के हितों के लिए बार-बार अधिक पैसा कमाने को चुना। हॉगेन ने जिन एल्गोरिदम का उल्लेख किया था, उन्हें 2018 में प्लेटफॉर्म पर लॉन्च किया गया था। फेसबुक ने इसका इस्तेमाल अपने यूजर्स में भय और नफरत पैदा करके प्लेटफॉर्म पर लोगों की मौजूदगी को बढ़ाने के लिए किया। उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए कि आप जानते हैं कि फेसबुक के अंदर क्या चल रहा है और आप जानते हैं कि बाहर कोई नहीं जानता। मुझे पता था कि अगर मैं फेसबुक के अंदर रहना जारी रखता हूं तो मेरा भविष्य कैसा दिखता।

कई देशों की राजनीति को प्रभावित कर रहा फेसबुक

फ्रांसेस ने फेसबुक में नौकरी की थी और उन्होंने कई दस्तावेज़ कॉपी भी किये, क्योंकि उन्हें कहीं न कहीं फेसबुक की कथनी और करनी में अंतर लगा था। फ्रांसेस ने एक स्टडी में बताया कि फेसबुक ने हेट स्पीच पर 3 से 5 प्रतिशत ही कदम उठाए हैं और “हिंसा और भड़काने” वाली गतिविधियों के अंतर्गत केवल 1% पर। इसके साथ ही हॉगन ने कहा कि जब हम एक ऐसे सूचना वातावरण में रहते हैं जो क्रोधित, घृणास्पद, ध्रुवीकरण वाली सामग्री से भरा होता है, तो यह हमारे सामाजिक समरसता को प्रभावित करता है और  एक-दूसरे में हमारे विश्वास को भी संदेहास्पद बना देता है। फेसबुक पर आज भी ऐसे संस्करण मौजूद हैं जो हमारे समाजों को तोड़ रहे हैं और दुनिया भर में जातीय हिंसा का कारण भी बन रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने 2018 में म्यांमार सहित जातीय हिंसा का जिक्र कर कहा कि ' सेना ने नरसंहार शुरू करने के लिए फेसबुक का इस्तेमाल किया।

 कैपिटल हिल वाली घटना को लेकर कही बड़ी बात

फ्रांसेस का कहना था कि वर्ष 2020 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के बाद जिस प्रकार से सिविक इन्टीग्रेटी टीम को समाप्त कर दिया गया, जो यूजर्स की रक्षा करने के लिए था, तब से उनका विश्वास फेसबुक से हट गया। फेसबुक का कहना था कि उसने अपना काम कई लोगों में बाँट दिया, मगर फ्रांसेस का कहना था कि फेसबुक ने ध्यान देना बंद कर दिया और जिसके कारण कैपिटल हिल में 6 जनवरी वाली घटना हुई। 

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