सफेद पूंछ वाले हिरण हो रहे कोरोना वायरस से संक्रमित, अमेरिका के नए रिसर्च में हुआ खुलासा

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Nov 09, 2021

अमेरिका के नए शोध से पता चला है कि सफेद पूंछ वाले हिरण सार्स-कोव-2 से संक्रमित हो रहे हैं। यह वही वायरस है, जो मनुष्यों में कोविड-19 का कारण बनता है। जनवरी से मार्च 2021 के बीच मिशिगन, पेंसिल्वेनिया, इलिनोइस और न्यूयॉर्क राज्यों में जिन हिरणों का परीक्षण किया गया उनमें से 40% में एंटीबॉडी पाए गए। एक अन्य अप्रकाशित अध्ययन में नवंबर 2020 और जनवरी 2021 के बीच आयोवा में लिए गए नमूनों में 80% हिरणों में वायरस होने की बात कही गई है। संक्रमण के इस तरह के उच्च स्तर को देखते हुए शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष निकाला कि हिरण सक्रिय रूप से वायरस को एक दूसरे तक पहुंचा रहे हैं।

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पिछले अध्ययनों से पता चला है कि सार्स-कोव-2 को मनुष्यों से घरेलू और बंदी जानवरों में पारित किया जा सकता है, जिनमें बिल्लियाँ, कुत्ते, चिड़ियाघर के जानवर और, विशेष रूप से पाले जाने वाले मिंक शामिल हैं। लेकिन, अब तक यह रोग वन्यजीव प्रजातियों में फैलता नहीं दिखा था। सफेद पूंछ वाले हिरण उत्तरी अमेरिका में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले स्तनपायी हैं, जो कनाडा से दक्षिण अमेरिका तक पाए जाते हैं। अनुमान है कि अकेले अमेरिका में इनकी आबादी तीन करोड़ के आसपास है। वे एक सामाजिक प्रजाति हैं जो शहरी पार्कों और वुडलैंड सहित कई प्रकार के आवासों में दो से 12 सदस्यों वाले परिवार समूहों में रहते हैं। उनकी पारिस्थितिकी और व्यवहार के इन पहलुओं ने उन्हें बीमारियों के प्रसार के लिए विशेष चिंता का विषय बना दिया है। इन रोग फैलाने वाले प्राणियों ने दुनिया भर में जंगली और घरेलू जानवरों की आबादी के स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव डाला है। इन नवीनतम अध्ययनों के निष्कर्षों ने चिंता जताई है कि सफेद पूंछ वाले हिरण सार्स-कोव-2 का भंडार हो सकते हैं। यह न केवल बड़ी संख्या में जानवरों को आसानी से संक्रमित कर सकता है, बल्कि इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि यह मनुष्यों में भी फैल सकता है। यह रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि वर्तमान में सफेद पूंछ वाले हिरण से मनुष्यों में सार्स-कोव-2 के संचरण का कोई सबूत नहीं है।

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प्रारंभिक प्रायोगिक कार्य से यह भी पता चलता है कि संक्रमित हिरणों में लक्षण नहीं होते हैं। फिर भी, वन्यजीव आबादी में रोग संचरण का मानव और पशु स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ता है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि इन अध्ययनों को तैयार करने के दौरानइस्तेमाल किए गए तरीकों और जांच की सीमित भौगोलिक सीमाएं हैं। सबसे हालिया और अप्रकाशित अध्ययन में ऊतक के नमूनों में सार्स-कोव-2 का मज़बूती से पता लगाने के लिए नवीनतम आनुवंशिक तरीकों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन केवल आयोवा में हिरण पर ध्यान केंद्रित किया। जबकि पहले अध्ययन में एंटीबॉडी परीक्षण चार राज्यों में किए गए थे, लेकिन केवल यह दिखाते हैं कि जानवर वायरस के संपर्क में आया है। फिर भी संयुक्त निष्कर्षों ने उजागर किया है कि सार्स का संचरण सफेद पूंछ वाले हिरणों में व्यापक होने की आशंका है। कोविड और हिरण के बीच विकसित होते घटनाक्रम को समझने के लिए हमें अभी और बहुत कुछ जानने की जरूरत है। ध्यान केंद्रित करने वाले सबसे महत्वपूर्ण विषयों में यह समझना शामिल है कि मनुष्यों से हिरणों में वायरस कैसे प्रसारित किया जा रहा है और मानव आबादी में हिरण से इस वायरस से संक्रमित होने का कितना जोखिम है।

-ग्रीम शैनन, एमी ग्रेशम और ओवेन बार्टन, बांगोर यूनिवर्सिटी बांगोर (यूके) 

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