कौन हैं दत्तात्रेय होसबाले? जिन्हें बनाया गया है संघ का सरकार्यवाह

By अभिनय आकाश | Mar 20, 2021

बैंगलुरू में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की दो दिवसीय बैठक आज समाप्त हो गई। वैसे तो ये बैठक नागपुर में होती है लेकिन कोविड-19 के कारण इस बैठक को बेंगलुरु में किया गया। ये बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक है जिसमें संघ की वार्षिक रिपोर्ट के साथ ही इसमें एक बेहद ही अहम फैसला हुआ। ये फैसला है कि संघ का अगला सर कार्यवाहक कौन होगा? सुरेश जोशी जिन्हें सुरेश भैय्याजी जोशी भी बोला जाता है उनकी जगह दत्तात्रेय होसबाले को संघ का सर कार्यवाहक बनाया गया है। बेंगलुरु के चेन्नहल्ली स्थित जनसेवा विद्या केंद्र में चल रहे प्रतिनिधि सभा की बैठक के अंतिम दिन ये निर्णय हुआ। दत्तात्रेय इससे पहले सह सरकार्यवाह का दायित्व निभा रहे थे। 

हर तीन साल पर होता है सरकार्यवाह का चुनाव। आम बोल चाल की भाषा में समझे जो एक सीईओ की तरह सरकार्यवाह काम करते हैं। आसएसएस में रोजमर्रा का जो भी रूल होता है वो सरकार्यवाह ही तय करते हैं। उनके नीचे सहकार्यवाह भी होते हैं। फिर जिसके बाद टीम की घोषणा करते हैं जो अगले तीन सालों तक काम करते हैं। माना जा रहा है कि अगले दस साल तक वो इस पद पर काम कर सकते हैं।

दत्तात्रेय होसबाले (लोकप्रिय रूप से आरएसएस में दत्ता जी के नाम से जाने जाते हैं) कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले के सोरबा तालुक के एक छोटे से गाँव होसाबले से हैं। उनका जन्म 1 दिसंबर 1954 को हुआ। स्कूली शिक्षा उनके जन्म स्थान होसाबले और सागर (तालुक मुख्यालय) में हुई। अपनी कॉलेज की शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए वे बेंगलुरु गए और प्रसिद्ध नेशनल कॉलेज में दाखिला लिया। बाद में, होसबाले ने साहित्य को अपना लिया और बेंगलुरु विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एमए किया उन्होंने 1968 में आरएसएस और फिर 1972 में छात्र संगठन एबीवीपी ज्वाइन किया। वे 1978 में एबीवीपी के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। वह 15 साल तक एबीवीपी के महासचिव रहे थे और उनका मुख्यालय मुंबई था। वह एक कन्नड़ मासिक असीमा के संस्थापक संपादक थे। 2004 में वह आरएसएस के बौद्धिक विंग के सेकेंड इन कमांड साह-बौधिक प्रमुख के रूप में रह चुके हैं। वह कन्नड़, हिंदी, अंग्रेजी, तमिल और संस्कृत में निपुण हैं। होसबले संयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन में हिंदू स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक गतिविधियों के संरक्षक भी थे। 

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फुटबॉल को वैश्विक एकता का प्रतीक करार दिया

फुटबॉल विभिन्न सभ्यताओं, महाद्वीपों और सीमाओं से परे जाकर प्रशंसकों, शौकीनों, अनुयायियों और निष्णातों को एकसूत्र में जोड़ने वाला खेल रहा है। वर्षों से प्राचीन भारत और प्राचीन ग्रीस में शासक एवं सामान्य वर्ग का बड़ा भाग इस पसंदीदा खेल का आनंद लेता रहा है। इस खेल में गेंद को पैर से बल के साथ उछाला जाता है। उनका कहना है कि यह युगों से चला आ रहा है - प्राचीन भारत में, जैसा कि प्राचीन ग्रीस में गेंद को पैर से मारने का खेल था, एक विशाल लोकप्रिय खेल था जिसे बहुत सारे लोग पसंद करते थे।

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