कौन हैं जेएनयू की पहली महिला कुलपति शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित? जानें इनके बारे में

By प्रिया मिश्रा | Feb 08, 2022

शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार (7 फरवरी) को प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की पहली महिला कुलपति नियुक्त किया। प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुडी पंडित जेएनयू की पहली महिला कुलपति होंगी। शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वीसी के रूप में प्राेफेसर पंडित का कार्यकाल पांच साल की अवधि का होगा। जेएनयू के विजिटर और राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रोफेसर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित की बतौर जेएनयू कुलपति नियुक्ति आदेश जारी किए थे।

शांतिश्री धूलिपुडी पंडित वर्तमान में महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में राजनीति और लोक प्रशासन विभाग में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर हैं। 59 वर्षीय शांतिश्री धूलिपुडी पंडित जेएनयू की पूर्व छात्रा भी हैं, जहां उन्होंने एमफिल के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की है। पीएचडी में उनकी थीसिस 'भारत में संसद और विदेश नीति - नेहरू वर्ष' पर थी।

डॉ शांतिश्री के पिता डॉ धूलिपुडी अंजनेयुलु एक प्रतिष्ठित लेखक, पत्रकार और सेवानिवृत्त सिविल सेवक हैं। उनकी माँ प्रोफेसर मुलामूदी आदिलक्ष्मी  (तत्कालीन) यूएसएसआर में लेनिनग्राद ओरिएंटल फैकल्टी विभाग में तमिल और तेलुगु के प्रोफेसर थी। डॉ शांतिश्री बचपन से ही एक शानदार छात्रा थीं और वे 12वीं की परीक्षा में तमिलनाडु राज्य में प्रथम स्थान पर रहीं। उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से इतिहास और सामाजिक मनोविज्ञान में गोल्ड मेडल के साथ स्नातक की डिग्री हासिल की। और उसी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में परास्नातक की डिग्री प्राप्त की है। इसके अलावा, उन्होंने स्वीडन में उप्साला विश्वविद्यालय से शांति और संघर्ष अध्ययन का अध्ययन किया।

कई सरकारी विभागों और सलाहकार बोर्डों के सदस्य

शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने 1988 में गोवा विश्वविद्यालय में अपने शिक्षण करियर की शुरूआत की थी। 1993 में उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने विभिन्न शैक्षणिक निकायों में प्रशासनिक पदों पर कार्य किया है। डॉ शांतिश्री ने देश के कई सरकारी विभागों और सलाहकार बोर्डों के सदस्य के रूप में भी काम किया है। 2005 में, उन्हें सुलह पर राष्ट्रीय समिति के सदस्य के रूप में चुना गया था। उन्होंने ग्लोबल इंडिया फाउंडेशन, राष्ट्रीय स्तर के थिंक टैंक के सदस्य के रूप में भी काम किया है। वह 2006-2008 तक उच्च शिक्षा और संकेतकों पर यूजीसी समिति की सदस्य और 2010-2013 के बीच इंडियन एसोसिएशन फॉर अमेरिकन स्टडीज [आईएएएस] की कार्यकारी समिति की सदस्य थीं। 

कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित 

अपने अकादमिक करियर में, डॉ शांतिश्री को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। उन्हें 2003 में गांधीवादी अध्ययन के लिए युवा मंच से महिला शिक्षक पुरस्कार, पुणे में वीर सावरकर पुरस्कार, 2010 और शिक्षा के लिए अगले दशक में महिला नेताओं के लिए वाइजटेक्स पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। 

लिखी हैं कई पुस्तकें 

एक लेखक के रूप में, शांतिश्री धूलिपुडी पंडित ने चार पुस्तकें - भारत में संसद और विदेश नीति (1990), एशिया-नैतिकता और नीति में पर्यावरण शासन का पुनर्गठन (2003), लिखी हैं। डॉ रिमली बसु के साथ सह-लेखकके तौर पर उन्होंने दो पुस्तकें - 'सांस्कृतिक कूटनीति: बौद्ध धर्म और इंडियाज लुक ईस्ट पॉलिसी' और 'रिट्रीट ऑफ द स्टेटः 2012 में एशिया में मादक पदार्थों की तस्करी के प्रभाव', लिखी हैं। 

डॉ शांतिश्री की नियुक्ति पर भड़का आक्रोश

डॉ शांतिश्री धूलिपुडी पंडित की नियुक्ति के तुरंत बाद, छात्रों के साथ-साथ सोशल मीडिया के एक वर्ग ने जेएनयू विरोध के खिलाफ अपने कुछ विवादास्पद पुराने ट्वीट्स के कारण उन्हें कुलपति का पद दिए जाने का विरोध करना शुरू कर दिया। सोशल मीडिया पर कई लोग उन पर इस्लामोफोबिक होने का आरोप लगा रहे हैं।


वरुण गांधी ने की कड़ी आलोचना

जेएनयू की कुलपति (वीसी) के रूप में शांतिश्री धूलिपुडी पंडित की नियुक्ति पर भाजपा सांसद वरुण गांधी ने कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इस तरह की ‘औसत दर्जे की नियुक्तियां हमारी मानव पूंजी और युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाती हैं।’ वरुण ने पदभार संभालने के बाद पंडित द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति को ट्विटर पर साझा किया और कहा कि यह ‘निरक्षरता’ का प्रदर्शन है। भाजपा सांसद ने कहा, ‘जेएनयू की नई वीसी की यह प्रेस विज्ञप्ति ‘निरक्षरता’ का प्रदर्शन है, जिसमें व्याकरण संबंधी अशुद्धियों की भरमार है।

इस तरह की औसत दर्जे की नियुक्तियां हमारी मानव पूंजी और हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचाने का काम करती हैं।’ केंद्र सरकार ने 59 वर्षीय पंडित को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की नई कुलपति नियुक्त किया है, जिससे वह इस विश्वविद्यालय में इस पद पर आसीन होने वाली पहली महिला बन गई हैं। पंडित जेएनयू की छात्रा रह चुकी हैं। उन्होंने यहां से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एमफिल के साथ-साथ पीएचडी की है।

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