राम मंदिर पर फैसले को कौन टालना चाहता था? रंजन गोगोई ने ऐसे फेरा उसकी मंशा पर पानी, पूर्व CJI ने किए हैरतअंगेज खुलासे

By अभिनय आकाश | Dec 09, 2021

एक किताब इन दिनों खासा चर्चा में है, नाम है जस्टिस फॉर द जज: एन ऑटोबायोग्राफी। अयोध्या भूमि पर प्रभु राम के मंदिर के निर्माण के लिए जिस फैसले में रामलला के नाम जमीन के हक में हस्ताक्षर ने वर्षों से चले आ रहे वनवास को खत्म किया उसके बारे में विस्तार से वर्णन किया गया है। इस किताब को देश के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और राज्यसभा सांसद रंजन गोगोई ने लिखा है। रंजन गोगोई ने अपनी किताब में अयोध्या से जुड़े मुद्दे पर कई हैरतअंगेज खुलासे किए हैं। जिसके बाद से ही अयोध्या मंदिर को लेकर राजनीतिक अटकलों का बाजार एक बार फिर गर्म हो गया है। 

रंजन गोगोई ने खुलासा करते हुए बताया कि अयोध्या मसले वाले जिन एक शख्स था जो फैसले में बाधा डालने की कोशिश में था। जिसको उन्होंने फैसले में बाधा डालने से रोका था। अगर 16 अक्टूबर 2019 को जिस दिन सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या भूमि विवाद मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था, उस दिन किसी अज्ञात व्यक्ति को अदालत कक्ष में प्रवेश करने से नहीं रोका जातो तो सुनवाई बाधित हो सकती थी और सर्वसम्मत 5-0 से ऐतिहासिक 9 नवंबर 2019 को राम मंदिर के पक्ष में फैसला नहीं सुनाया जा सकता था। अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार एक व्यक्ति न्यायपालिका के कार्य में बाधा डाल रहा था। उसे जस्टिस गोगोई के आदेश के बाद अदालत में आने से रोक दिया गया था। जस्टिस गोगोई ने बताया कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया क्योंकि उन्हें आभास हो गया था कि उस शख्स का उद्देश्य केवल सुनवाई को बाधित करना था। उस शख्स को लेकर गोगोई ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया, “मैं उसकी पहचान कभी नहीं बताऊंगा। 

फैसले देने के बाद की पार्टी 

पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई ने राम मंदिर के मसले पर बेंच के ऐतिहासिक फैसले के बाद हुई पार्टी का भी जिक्र अपनी इस आत्मकथा में किया है। उन्होंने लिखा है कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद पर 9 नवंबर, 2019 को सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाने के के बाद मैं उस बेंच के अन्य जजों को डिनर के लिए होटल ताज मानसिंह लेकर गया था। वहां सभी ने पसंदीदा डिनर ऑर्डर करने के साथ ही वाइन पी थी।

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