जो भी चीन के करीब जाएगा वहां तख्तापलट हो जाएगा? अमेरिका के इशारे पर नेपाल में विद्रोह

By अभिनय आकाश | Sep 09, 2025

जो बाइडेन जब सत्ता में थे तो उस दौरान कई देशों में तख्तापलट हुआ। ट्रंप जब आए तो अब ऐसा लगता है कि उनके कार्यकाल में भी दुनिया के तमाम देशों में तख्तापलट होगा जो उनकी बात नहीं सुनेंगे। अब भारत के पड़ोसी नेपाल में ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है। जिस तरह से सड़कों पर प्रदर्शनकारी बवाल काट रहे हैं। हंगामा कर रहे हैं। मरने मारने के लिए तैयार हैं। संसद भवन में घुसकर हंगामा करने का प्लान कर चुके हैं। लग रहा है कि नेपाल में भी तख्तालट होने की तैयारी कर ली गई है। पिछले कुछ समय से आपने देखा है कि कैसे नेपाल में हिंदू राष्ट्र बनाने को लेकर मांग उठी और सड़कों पर लोग उतरे। उसके बाद से ही नेपाल में काफी उथल पुथल देखने को मिली। अब जब नेपाल सरकार ने ये फैसला लिया कि सोशल मीडिया नहीं चलेगा। फिर बवाल शुरू हो गया। युवा सड़कों पर उतर गए।

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श्रीलंका में युवाओं को आगे करके राजपक्षे की पूरी सत्ता उखाड़ फेकी गई। जपक्षे परिवार की पार्टी साफ, विक्रमसिंघे जेल गए, 2022 के आर्थिक संकट के बाद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षा देश छोड़कर भागे। 23 सितंबर 2024 में अनुरा कुमार दिसानायके राष्ट्रपति बने। अनुरा सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की। पूर्व राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और 5 पूर्व मंत्रियों को भष्ट्राचार के मामलों में जेल की सजा सुनाई गई। 

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अब ठीक वहीं हालात नेपाल में पैदा कर दिए गए हैं। नेपाल में 18 से 25 साल के युवा सड़कों पर हैं। वे सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे हुए हैं। काठमांडू के सोतमिराज धुंगाना ने एक पोस्ट में लिखा कि अब सरकार हमारी आवाज कयलना चाहती है। नेता अभिव्यक्ति की आजादी की बातें करते हैं, लेकिन हमारी आवाज बंद कर देते हैं। यह शर्मनाक है। हम चुप नहीं रहेंगे। एक अन्य नेपाली यूजर ने लिखा- राजनीतिक परिवारों के बच्चे महंगी माड़ियां, विदेश में पढ़ाई और शाही जिंदगी जीते हैं, यी भी जनता के टैक्स के पैसों से। युवा एक प्रदर्शनकारी ने छात्र ने बताया कि कुछ देर पहले पुलिस ने गोलियां चलाई। मुझे नहीं लगी, लेकिन पीछे खड़े दोस्त को हाथ में लग गई। अभी भी गोलीबारी चल रही है। संसद के अंदर से भी आवाज आ रही है। सड़क पर खड़े दोस्त को सिर में गोली लगी। पुलिस घुटनों के ऊपर निशाना लगाकर अंधाधुंध गोली चला रही है। क्या उन्हें यह करने का हक है?

श्रीलंका का चीन से करीब जाना और हंबनटोटा पर बीजिंग की मौजूदगी। समुद्र में भारत के खिलाफ खुफिया जानकारी एकट्ठा करना। हालांकि भारत ने चीन और श्रीलंका को ठीक ठाक तरीके से जवाब दिया और मजबूर हालाक में कोलंबो को मदद भी पहुंचाई। अमेरिका का भी श्रीलंका संकट में बहुत बड़ा रोल कहा जाता है। एशिया में जो भी चीन के करीब जाता है उसे अमेरिका द्वारा पसंद नहीं किया जाता है। श्रीलंका चीन के करीब गया और वहां तख्तापलट हो जाता है। आज तक स्थिति नहीं सुधरी। बांग्लादेश भारत के विरोध में चीन के करीब गया। बांग्लादेशी नेताओं की यात्राएं हुई और शेख हसीना के खिलाफ प्लानिंग हुई। फिर वहां भी तख्तापलट हो गया। 

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