By अभिनय आकाश | Oct 07, 2026
फ्रांस में इस वक्त भारी बवाल कटा हुआ है। जहां स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन अब एक अलग रूप लेता दिखाई दे रहा है। जहां हजारों छात्र, शिक्षक और अभिभावक सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में प्रदर्शन हुए हैं और कुछ जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी देखने को मिला है। सड़कों पर बवाल है, आगजनी हुई है और पुलिस की ओर से एक्शन भी देखने को मिला है। लेकिन फ्रांस में चल रहे इस पूरे मामले पर अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान सामने आया है। जहां उन्होंने फ्रांस में हो रहे इन प्रदर्शनों को सीधे बड़े पैमाने पर माइग्रेशन और इस्लाम से जोड़ दिया है।
छात्रों ने स्कूल के लंबे समय और लंच ब्रेक जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए हैं। शुरुआत पेरिस के इलाकों से हुई और धीरे-धीरे प्रदर्शन फ्रांस के दूसरे शहरों तक पहुंच गया। मार्ससे, लन, नानते, स्ट्रासबर्ग और कई अन्य शहरों में भी छात्र सड़कों पर उतर आए। कई जगह स्कूलों के गेट बंद किए गए और प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की। लेकिन जैसे-जैसे प्रदर्शन बढ़ता गया, कुछ जगहों पर हालात तनावपूर्ण होने लगे। पुलिस ने भीड़ को हटाने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया और कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों की तरफ से आगजनी और पुलिस पर चीजें फेंकने की घटनाएं भी सामने आई। पेरिस में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ और दिन के अंत में पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए कार्यवाही की। इस पूरी स्थिति में नाबालिक छात्रों की मौजूदगी ने भी सवाल खड़े किए हैं। मानवाधिकार संगठनों और छात्र तथा अभिभावक समूहों ने पुलिस की कार्यवाही पर चिंता जताई है। जबकि सरकार का कहना है कि आंदोलन के कुछ हिस्सों में बाहरी लोगों की भूमिका है और कुछ जगहों पर यह आंदोलन हिंसा में बदल गया है। फ्रांस की सरकार ने भी स्थिति को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री सेबॉस्टियन लेकोरनू ने छात्रों की प्रमुख मांगों पर काम करने के निर्देश दिए हैं।