Wholesale Inflation का नया रिकॉर्ड, Fuel और Crude Oil की कीमतों ने दिया बड़ा झटका

By Ankit Jaiswal | Jun 15, 2026

देश में थोक महंगाई ने मई महीने में नया रिकॉर्ड बना दिया है। ईंधन, ऊर्जा और कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते थोक स्तर पर महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पहुंच गई है। यह अप्रैल में दर्ज 8.26 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है और नई श्रृंखला के तहत अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार नई श्रृंखला में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। इसके अलावा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे नए ऊर्जा स्रोतों को भी इसमें शामिल किया गया है। सरकार ने पहली बार उत्पादक मूल्य सूचकांक भी जारी किया है, जिससे उद्योगों में कच्चे माल और तैयार उत्पादों की कीमतों में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मई में महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके कारण ऊर्जा बाजार में पैदा हुई अनिश्चितता रही है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इस मार्ग पर बढ़े तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ा है।

ईंधन और ऊर्जा समूह में महंगाई दर अप्रैल के 24.89 प्रतिशत से बढ़कर मई में 30.33 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस से जुड़ी महंगाई 56.31 प्रतिशत से बढ़कर 61.51 प्रतिशत हो गई। मंत्रालय के अनुसार खनिज तेल, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रसायन उद्योग और मूल धातु क्षेत्र मई में महंगाई के प्रमुख कारक रहे हैं।

गौरतलब है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर खाद्य वस्तुओं पर भी दिखाई देने लगा है। खाद्य पदार्थों की महंगाई अप्रैल के 2.43 प्रतिशत से बढ़कर मई में 3.60 प्रतिशत पहुंच गई। वहीं विनिर्मित उत्पादों में महंगाई दर 6.68 प्रतिशत से बढ़कर 7.48 प्रतिशत दर्ज की गई है।

इस बीच खुदरा महंगाई भी लगातार दूसरे महीने बढ़ी है। मई में खुदरा महंगाई 3.93 प्रतिशत रही, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। हालांकि थोक महंगाई अभी भी खुदरा महंगाई की तुलना में काफी अधिक बनी हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक मुख्य रूप से खुदरा महंगाई को ध्यान में रखकर अपनी मौद्रिक नीति तय करता है। सरकार ने रिजर्व बैंक को चार प्रतिशत महंगाई का लक्ष्य दिया है, जिसमें दो प्रतिशत ऊपर और नीचे की सीमा निर्धारित की गई है। हाल ही में रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।

मौजूद जानकारी के अनुसार मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में प्रति लीटर 7.50 रुपये तक की वृद्धि हुई थी। इसका असर आने वाले महीनों में परिवहन लागत और उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।

विशेषज्ञों को हालांकि जून में कुछ राहत की उम्मीद है। इक्रा के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और वैश्विक ऊर्जा कीमतों में नरमी आने से जून में थोक महंगाई पर दबाव कम हो सकता है। वहीं इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की मेघा अरोड़ा के अनुसार जून में थोक महंगाई मामूली घटकर 9.3 प्रतिशत रह सकती है, लेकिन इसे पुराने स्तरों पर लौटने में अभी समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि अल नीनो की आशंका के कारण मानसून पर दबाव बना हुआ है, जिससे खाद्य कीमतें निकट भविष्य में ऊंची बनी रह सकती हैं।

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