Sumitranandan Pant Birth Anniversary: जिसकी Poetry में बसता है Uttarakhand का सौंदर्य, कौन थे सुमित्रानंदन पंत

By अनन्या मिश्रा | May 20, 2026

हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख स्तंभ 'प्रकृति के सुकुमार कवि' सुमित्रानंदन पंत का 20 मई को जन्म हुआ था। सुमित्रानंदन पंत हिंदी भाषा के 20वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध कवियों में से एक थे। पंत को अपनी कविताओं में प्रेम के लिए जाने जाते थे। उनका झुकाव हमेशा से प्रकृति सौंदर्य की ओर ज्यादा था। यही वजह है कि पंत की कविताएं पढ़कर लोग ख्यालों में ऐसा महसूस करने लगते हैं, जैसे की वह प्रकृति के बेहद करीब हों। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर कवि सुमित्रानंदन पंत के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

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रचनाएं

सुमित्रानंदन पंत की रचनाशीलता गति पकड़ती चली गई। साल 1918 के आसपास पंत हिंदी की नवीन धारा के प्रवर्तक के रूप में पहचाने जाने लगे। वहीं साल 1926-27 में सुमित्रानंदन पंत का पहला काव्य संग्रह 'पल्लव' प्रकाशित हुआ था। फिर कुछ समय बाद वह अपने भाई के साथ अल्मोड़ा आ गए। इस दौरान पंत कार्ल मार्क्सऔर फ्रायड की विचारधारा के प्रभाव में आए। वहीं साल 1938 में पंत ने 'रूपाभ' नामक मासिक पत्रिका निकाली।

इसके अलावा 'पल्लव' और 'वीणा' में संकलित उनके छोटे गीत सुमित्रानंदन पंत के अनूठे सौंदर्यबोध की मिसाल है। पंत के जीवनकाल में उनकी 28 पुस्तकें प्रकाशित हुईं, जिनमें नाटक, कविताएं और निबंध आदि शामिल हैं। वहीं सुमित्रानंदन पंत की सबसे कलात्मक कविताएं 'पल्लव' में ही संकलित हैं।

पुरस्कार

हिंदी साहित्य में विशेष योगदान के लिए सुमित्रानंदन पंत को साल 1961 में 'पद्मभूषण', साल 1968 में 'ज्ञानपीठ और साहित्य अकादमी' और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार जैसे सम्मानों से अलंकृत किया गया।

मृत्यु

वहीं 28 दिसंबर 1977 को इलाहाबाद में सुमित्रानंदन पंत का निधन हो गया था।

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