By अंकित सिंह | Jun 11, 2026
AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द करने की प्रक्रिया पर चिंता जताई। मीडिया से बात करते हुए ओवैसी ने सवाल किया कि चुनाव आयोग के नामांकन फॉर्म के नियम के अनुसार, अगर आपके खिलाफ कोई FIR दर्ज है, तो आपको इसकी जानकारी देनी होती है। अब, उनका कहना है कि कोई FIR नहीं है। इस मामले में, आगे क्या कदम उठाए जाएं, इसके लिए चुनाव आयोग से सलाह लेनी होगी।
ओवैसी ने आगे कहा कि सिंघवी के हवाले से आई मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नटराजन के खिलाफ अभी कोई FIR दर्ज नहीं है, बल्कि सिर्फ़ एक प्राइवेट शिकायत है और उन्हें कोर्ट में पेश होने का नोटिस मिला है। उन्होंने कहा कि मुझे पूरी सच्चाई तो नहीं पता, लेकिन मैंने जो सुना और अखबारों में पढ़ा है, उसके अनुसार सिंघवी का कहना है कि उनके खिलाफ कोई FIR नहीं है। ये टिप्पणियां राज्यसभा नामांकन के लिए पात्रता मानदंडों और इस प्रक्रिया के दौरान लंबित शिकायतों या कानूनी मामलों से निपटने के तरीकों को लेकर चल रही बहस के बीच आई हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि नामांकन दाखिल करते समय FIR सहित सभी ज़रूरी जानकारी का खुलासा किया जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश से मीनाक्षी नटराजन के नॉमिनेशन (नामांकन) के रद्द होने पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस का दस-सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल नई दिल्ली में चुनाव आयोग से मिला। कांग्रेस सांसद और सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फ़ैसले को "गलत" और 'जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम' (Representation of the People Act) के ख़िलाफ़ बताया। उन्होंने कहा कि नटराजन के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले में अभी तक संज्ञान (cognisance) लेने का चरण नहीं आया है। सुप्रीम कोर्ट, नटराजन के नॉमिनेशन पेपर रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमत हो गया है। सीनियर वकील सिंघवी ने जस्टिस पीके मिश्रा और अतुल एस. चंदुरकर की बेंच के सामने यह मामला रखा। उन्होंने इसे सचमुच ज़रूरी मामला बताते हुए जल्द सुनवाई या एक लाइन का अंतरिम आदेश देने की मांग की।
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