रूस पर इतना निर्भर क्यों हैं यूरोपीय देश? पुतिन लगाएंगे गैस पर रोक तो बढ़ जाएंगी मुश्किलें

By अंकित सिंह | Aug 02, 2022

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध अभी भी जारी है। पिछले लगभग 5 महीने से दोनों देशों के बीच वार-पलटवार का दौर चल रहा है। रूस ने फरवरी महीने में ही यूक्रेन में सैन्य अभियान की शुरुआत की थी। इसके बाद से कई देशों ने रूस पर अलग-अलग तरह की पाबंदियों का ऐलान किया था। हालांकि, इसकी वजह से कई देशों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अलग-अलग देशों द्वारा रूस पर लगाई गई पाबंदियों की वजह से यहां की आर्थिक स्थिति पर बुरा असर भी पड़ा है। हालांकि, अब रूस की ओर से भी ऐसे देशों पर पलटवार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि इसका सबसे ज्यादा असर यूरोपीय देशों पर पड़ने वाला है। हाल के दिनों में रूस ने पोलैंड और बुल्गारिया की गैस सप्लाई पर रोक लगाने का ऐलान कर दिया है। माना जा रहा है कि रूस की यह कार्रवाई अपनी मुद्रा में पेमेंट ना मिलने के बाद हुई है। खबर तो यह भी है कि रूस कई और यूरोपीय देशों में गैस सप्लाई को बंद कर सकता है। यही कारण है कि अब यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ी हुई है। आपके लिए यह जानना भी बेहद जरूरी है कि यूरोप के कई देश रूसी गैस पर निर्भर हैं।

सवाल यह भी है कि अगर रूस ने गैस सप्लाई को बंद कर दिया तो यूरोपीय देश क्या करेंगे? रूस ने मध्य जून से ही यूरोपीय देशों में गैस सप्लाई में कटौती करने की शुरुआत कर दी थी। उस वक्त रूस ने वार्षिक मरम्मत का हवाला दिया था। हालांकि, यूरोप के कई देश पहले से ही अनुमान लगा रहे थे कि आने वाले दिनों में रूस गैस की सप्लाई में कटौती कर सकता है। विशेषज्ञों की माने तो आने वाले दिनों में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गैस और तेल के दम पर यूरोपीय देशों पर और दबाव बनाने की कोशिश करेंगे। यूरोपीय संघ के देशों का भी यह दावा है कि रूस की तरफ से ऐसा उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति ने साफ तौर पर कह दिया है कि गैर मित्र देशों को गैस खरीदने के लिए रूसी मुद्रा रूबल में ही पेमेंट करना होगा। हालांकि, यूरोप में उर्जा मुहैया कराने वाली कंपनियां रूस की इस मांग के खिलाफ है। अगर वे ऐसा करते हैं तो कहीं ना कहीं यूरोपीय संघ की ओर से रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लंघन होगा। हालांकि, खबर यह भी है कि कई देश धीरे-धीरे व्लादिमीर पुतिन की मांग के सामने झुकने को मजबूर हो रहे हैं।

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रूस पर है निर्भरता

आपको बता दें कि यूरोपीय संघ के कुल प्राकृतिक गैस आयात में रूसी गैस की हिस्सेदारी लगभग 40% से ज्यादा है। अगर रूस यूरोपीय देशों को गैस सप्लाई बंद कर देता है तो इससे कहीं ना कहीं इन देशों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। इसका सबसे ज्यादा असर इटली और जर्मनी जैसे देशों पर देखने को मिलेगा। हालांकि, ब्रिटेन पर इसका बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा। ब्रिटेन रूस से सिर्फ 5 फ़ीसदी गैस ही आयात करता है। आंकड़ों की बात करें तो रूस जर्मनी को 42.6 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई करता है। इटली के लिए यह आंकड़ा 29.2 अरब क्यूबिक मीटर है। बेलारूस को रूस की ओर से 18.8 अरब क्यूबिक मीटर गैस सप्लाई होता है। तुर्की को 16.2, नीदरलैंड को 15.7, हंगरी को 10.6, पोलैंड को 9.6 अरब क्यूबिक मीटर में रूस की ओर से गैस सप्लाई होता है। पोलैंड के पास फिलहाल गैस भंडार 76% है तो वही बुल्गारिया के पास सिर्फ 17% ही बचा हुआ है।

अर्थव्यवस्था होगी प्रभावित 

सबसे बड़ी चिंता की बात तो यह है कि रूस द्वारा गैस को रोके जाने के बाद यूरोप की अर्थव्यवस्था पूरी तरीके से प्रभावित हो सकती है। कुछ विशेषज्ञों का तो दावा यह भी है कि अगर रूस यूरोप में गैस और तेल की सप्लाई रोक देता है तो वहां मंदी का खतरा भी पैदा हो सकता है। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी इकोनॉमी में आता है और यही कारण है कि वह रूस की एनर्जी पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है। यूरोप में गैस की किल्लत की वजह से ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों देशों पर दबाव बढ़ेगा। जिसके कारण महंगाई का भी खतरा बढ़ सकता है। यही कारण है कि यूरोप अब दूसरे देशों से गैस की आपूर्ति पर विचार कर रहा है। इसके लिए कतर, अल्जीरिया और नाइजीरिया से बात भी की जा रही है। हालांकि, समस्या यह भी है कि तत्काल गैस के उत्पादन में बढ़ोतरी करना एक बड़ी समस्या है और इसमें कई तरह की अड़चनें भी आएंगी। अगर यूरोप के देश दूसरे देशों से गैस की सप्लाई लेते हैं तो उन्हें यह महंगा भी पड़ेगा। इसका कारण यह है कि रूस से गैस की आपूर्ति सीधे पाइप लाइनों के जरिए हो जाती थी। लेकिन दूसरे देशों से इन्हें मंगाने के लिए अलग से व्यवस्थाएं करनी पड़ सकती है।

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आगे का विकल्प

यूरोप के देशों में सर्दियों का मौसम आने वाला है। ऐसे में वहां की चिंता और बढ़ गई हैं। ऊर्जा संयंत्रों को अब कोयले से चलाने की बात की जा रही है। लेकिन प्रदूषण एक बड़ा खतरा है। पोलैंड की ओर से कहा जा रहा है कि वह अमेरिका और खाड़ी देशों से गैस की आपूर्ति के लिए बात कर रहा है। यूरोप ऊर्जा के अन्य स्रोतों को बढ़ाने पर विचार जरूर कर रहा है। लेकिन उसमें वक्त लग सकता है। यूरोपीय संघ गैस की मांगों को तुरंत कम करने के लिए आपातकालीन योजनाओं पर लगातार विचार भी कर रहा है। इसमें अमेरिका से भी मदद की मांग की जा रही है। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि रूस की गैस आपूर्ति बंद होने की वजह से यूरोपीय संघ सर्दियों के लिए गैस भंडारण के लक्ष्य से 80 फ़ीसदी पीछे रह सकता है। हालांकि ऐसा नहीं है कि इसका असर सिर्फ यूरोपीय देशों पर ही पड़ेगा। अगर रूस यूरोपीय संघ को गैस और तेल की सप्लाई रोक देता है तो कहीं ना कहीं वहां की अर्थव्यवस्था को भी बड़ा झटका लग सकता है।

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