By अजय कुमार | Oct 31, 2024
सियासत भी अजब-गजब है यहां नेता साथ होकर भी अलग-अलग नजर आते हैं और अलग-अलग होते हुए भी साथ-साथ नजर आना चाहते हैं। विचारों की बात तो बेइमानी हो गई है। राजनीति का इससे अधिक गिरगिटी रंग क्या हो सकता है जो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेता इंडी गठबंबधन के नाम पर साथ-साथ होने का दम भरते हैं, लेकिन चुनाव मैदान में यूपी से लेकर महाराष्ट्र तक अपनी ढपली, अपना राग छेड़ते नजर आते हैं। यूपी के उप चुनाव में सपा ने कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दी, वहीं महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव में कांग्रेस के गठबंधन वाले महाअघाड़ी गठबंधन ने समाजवादी पार्टी को ठेंगा दिखा दिया। बस फर्क यह है कि यूपी में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दी तो कांग्रेस ने चुनाव रेस से अपने को साइड लाइन कर लिया, लेकिन महाराष्ट्र में जब सपा को एक भी सीट नहीं देकर हासिये पर खड़ा किया गया तो समाजवादी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बगावती रूप अख्तियार कर लिया। समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र में नौ सीटों पर चुनाव लड़ना चाह रही थी।
खैर, यहां अखिलेश की चर्चा उनके एक बयान को लेकर भी हो रही है। दरअसल, गठबंधन सियासत को लेकर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव हमेशा से बड़ा दिल दिखाने का दावा करते रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में जब कांग्रेस और बसपा के बीच बातचीत की खबरों पर बात हुई तब भी अखिलेश ने कहा था कि भाजपा को हराने के लिए हम बड़ा दिल दिखाने को तैयार हैं। लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से सीट शेयरिंग के मुद्दे पर भी अखिलेश ने बड़े दिल की बात की थी, लेकिन ऐन चुनाव के वक्त महाराष्ट्र में उनके रुख में बदलाव को विपक्षी गठबंधन के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा रहा है। वहीं अखिलेश से यह भी पूछा जा रहा है कि यूपी में बड़े दिल की बात करने वाले सपा प्रमुख महाराष्ट्र में तंग दिल कैसे हो जाते हैं।