Chai Par Sameeksha: Rahul Gandhi ने संसद के पहले ही सत्र में Modi को इतने सख्त तेवर क्यों दिखाए?

By अंकित सिंह | Jul 01, 2024

प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क के खास साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह विपक्ष के नेता और संसद सत्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गयी। इस दौरान प्रभासाक्षी संपादक ने कहा कि निचले सदन में 10 साल के अंतराल के बाद किसी नेता को आधिकारिक रूप से नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता के तौर पर राहुल गांधी को अब कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाएगा। इससे प्रोटोकॉल सूची में उनका स्थान भी बढ़ जाएगा। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने मजाकिया अंदाज में कहा कि नेता प्रतिपक्ष के तौर पर राहुल गांधी ने कुर्ता तो पहन लेकिन वह तुरंत टी-शर्ट में भी आ गए।

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नीरज दुबे ने कहा की जय संविधान कहना ही केवल जरूरी नहीं है। बल्कि संविधान के प्रति समर्पण दिखाना भी जरूरी है। प्रधानमंत्री के तौर पर मोदी अब तक तीन बार शपथ ले चुके हैं। तीनों बार जब उन्हें नेता चुना गया तो उन्होंने संविधान को माथे से लगाया। विपक्ष को अपना एजेंडा चलाना है इसलिए वह कुछ भी बोल सकते हैं। पहले सप्ताह में ही इन्होंने दलित कार्ड खेलना शुरू कर दिया। स्पीकर पद से लेकर दलित का क्या लेना देना। हमेशा से स्पीकर पद का चुनाव सर्वसम्मति से होता रहा है। विपक्ष ने उसे स्वीकार नहीं किया। नीरज दुबे ने कहा कि दलित के नाम पर कांग्रेस ने कई नेताओं को आगे किया जिसमें चन्नी और सुशील कुमार शिंदे का भी नाम है। लेकिन उसका नतीजा उसके पक्ष में नहीं गया है। नीरज दुबे ने कहा कि राहुल गांधी जिस सोच के नेता हैं तो उससे ऐसा लगता है कि वह इस बार कुछ नया करने की कोशिश करेंगे। लेकिन इसके लिए उन्हें खुद में भी बड़े बदलाव करने की जरूरत होगी। 

इस सप्ताह हमने संविधान बनाम इमरजेंसी का खूब शोर सुना। इसी को लेकर हमने नीरज दुबे से सवाल पूछा नीरज दुबे ने कहा कि कहीं ना कहीं इस तरीके से संविधान को लेकर विपक्ष भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहा है। इसी वजह से भाजपा की ओर से इमरजेंसी को उठाया गया। सरकार यह बताने की कोशिश कर रही है कि संविधान पर हमने नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी ने हमला किया। जब इंदिरा गांधी की सरकार ने देश में आपातकाल लगाया था, इस दौरान लोगों के अधिकार छीन दिए गए थे। नेताओं और पत्रकारों को जेलों में डाल दिया गया था। देश में संविधान पूरी तरीके से खत्म हो चुका था। एक व्यक्ति की मर्जी से शासन चल रहा था। यही बीजेपी आज की युवाओं को संदेश देने की कोशिश कर रही है कि देश में कौन लोकतंत्र का समर्थन है और किसने लोकतंत्र पर हमला किया था।

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