Turkey ने अचानक क्यों तान दी मिसाइलें? इजरायल के खिलाफ बड़ी लामबंदी, क्या करेंगे एर्दोगान

By अभिनय आकाश | Apr 24, 2026

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान का दो साल पुराना एक भाषण हाल ही में इंटरनेट पर फिर से वायरल हो गया। इस भाषण में उन्होंने कहा था कि तुर्की को इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए। लेकिन अब इसे इंटरनेट पर ऐसे फैलाया गया जैसे उन्होंने इजरायल पर सैन्य हमले की कोई नई धमकी दी हो। इजरायल का समर्थन करने वाले कुछ एक्स अकाउंट्स ने इसका गलत अनुवाद करके इस दावे को फैलाया। देखते ही देखते इजरायल और अमेरिका के कई मशहूर लोगों ने भी इसे सच मान लिया और शेयर करने लगे। जल्द ही यह झूठी खबर बड़े न्यूज़ चैनलों और अखबारों तक भी पहुँच गई। 'द टेलीग्राफ' जैसी बड़ी न्यूज़ एजेंसी ने भी इस खबर को छापा, हालांकि बाद में सच्चाई पता चलने पर उन्होंने इसे हटा लिया। जब यह साबित हो गया कि यह दावा पूरी तरह झूठा है, तब भी इजरायल की कुछ मीडिया ने इस पर बात करना बंद नहीं किया। कुछ खबरों में तो यहाँ तक कह दिया गया कि तुर्की "अगला ईरान" बन रहा है और भविष्य में तुर्की इजरायल के लिए एक बड़ा सैन्य खतरा बन सकता है।

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तुर्की के जानकार इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट जैसे नेताओं के बयानों पर कड़ी नजर रख रहे हैं। बेनेट ने खुले तौर पर तुर्की को एक 'बड़ा खतरा' बताया है और इशारा किया है कि तुर्की "अगला ईरान" बन सकता है। तुर्की में इन बातों को सिर्फ राजनीतिक जुमलेबाजी नहीं माना जा रहा है। इसे इजरायल की सोच में आ रहे एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी चर्चा इजरायली मीडिया में भी हो रही है। 7 अक्टूबर से पहले, गाजा का मुद्दा तुर्की में सबके लिए एक जैसा नहीं था। सरकार के समर्थकों के लिए यह भावनाओं से जुड़ा था, लेकिन विपक्ष इसे सिर्फ राष्ट्रपति एर्दोगान की विदेश नीति का एक हिस्सा मानता था, न कि पूरे देश का मुद्दा। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। हाल के सर्वे बताते हैं कि तुर्की के लगभग एक-तिहाई लोग अब इजरायल को अपने लिए एक सीधा खतरा मानते हैं। यह डर सिर्फ इजरायल की बयानबाजी से नहीं, बल्कि ईरान और लेबनान में उनके आक्रामक सैन्य हमलों को देखकर पैदा हुआ है। इसका नतीजा यह हुआ है कि तुर्की की आम जनता (विपक्ष के समर्थकों सहित) में इजरायल के खिलाफ भारी गुस्सा भर गया है। आज 93% तुर्की नागरिक इजरायल को नापसंद करते हैं। कई लोगों को तो यह भी डर है कि अगर ईरान हार गया, तो अगला निशाना तुर्की हो सकता है।

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लोगों की इस सोच ने तुर्की की राजनीति को भी बदल दिया है। पिछले एक साल में तुर्की का पूरा फोकस अपने देश को अंदर से मजबूत करने और बाहरी दबावों से बचने पर रहा है। हालांकि खुले तौर पर इसे 'इजरायल से लड़ाई की तैयारी' नहीं कहा गया है, लेकिन इस नीति के पीछे यह डर साफ है कि इजरायल में तुर्की के खिलाफ नफरत अब काफी गहरी और पक्की होती जा रही है।

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