Chai Par Sameeksha: Raghav Chadha से AAP ने क्यों बनाई दूरी? क्या है Arvind Kejriwal की मजबूरी?

By अंकित सिंह | Apr 06, 2026

प्रभासाक्षी के साप्ताहिक कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इस सप्ताह हमने राघव चड्ढा और मालदा घटनाक्रम पर चर्चा की। हमेशा की तरह इस कार्यक्रम में मौजूद रहे प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे। राघव चड्ढा के प्रकरण में नीरज दुबे ने साफ तौर पर कहा कि आखिर असली मामला क्या है यह तो या अरविंद केजरीवाल बता सकते हैं या राघव चड्ढा बता सकते हैं। लेकिन 2024 के आखिर तक दोनों के रिश्ते बेहद करीबी के रिश्ते थे और दोनों का एक दूसरे पर विश्वास भी बहुत था। लेकिन यह दूरियां क्यों आई, इस पर सवाल लगातार उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह बात सही है कि अरविंद केजरीवाल और राघव चड्ढा के बीच की दूरी पिछले एक-डेढ़ सालों से लगातार दिख रही थी। फिलहाल देखें तो मनीष सिसोदिया हो या अरविंद केजरीवाल हो इन पर जिस तरीके से आरोप लगाए गए थे। केजरीवाल और बाकी पार्टी के नेताओं पर लगे आरोपों से राघव चड्ढा अपनी दूरियां बनाने लगे थे। 

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नीरज दुबे ने कहा कि ऐसे कई लोग हैं जो राजनीति को नहीं समझते, नहीं जानते। लेकिन वह राघव चड्ढा का समर्थन कर रहे हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि राघव चड्ढा ने आम लोगों से जुड़े हुए मुद्दे उठाए हैं। हर मुद्दे उठाए हैं वह पंजाब के लोगों के भी बोलते रहे हैं। वह दिल्ली के लोगों के भी मुद्दे उठाते रहे हैं। इसके साथ ही नीरज दुबे ने कहा कि राजनीति में कोई भी किसी का कितना भी खास क्यों ना हो जब विश्वास कम होने लगता है तो वह खास लगातार दूर होते जाता है और यही हम राघव चड्ढा के केस में भी देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मालदा में न्यायिक अधिकारियों का घेराव किये जाने को लेकर पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रचार रणनीति का रविवार को केंद्र बिंदु बनाते हुए इस घटना को तृणमूल कांग्रेस का ‘‘महा जंगलराज’’ करार दिया। उन्होंने 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस द्वारा फैलाए गए भय और भाजपा के भरोसे के बीच सीधा मुकाबला बताया। मोदी ने पिछले महीने चुनाव की घोषणा होने के बाद, उत्तर बंगाल के कूचबिहार जिले में अपनी पहली चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मालदा घटना का इस्तेमालभाजपा के दोहरे चुनावी मुद्दों - ‘‘बिगड़ती कानून व्यवस्था’’ और कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए किया। 

उन्होंने कथित जनसांख्यिकीय परिवर्तन का हवाला देते हुए संदेशखालि मामला, बांग्लादेश से घुसपैठ, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी का उल्लेख करते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला। मोदी ने विधानसभा चुनाव को राज्य के भविष्य के लिए एक निर्णायक लड़ाई के रूप में पेश किया और चेतावनी दी कि 4 मई के बाद कानून का शासन लागू होने पर, तृणमूल कांग्रेस के गुंडों के कथित अत्याचारों का चुन चुन के हिसाब होगा।’’ उन्होंने कहा कि यह क्रूर सरकार प्रतिदिन बंगाल की पवित्र भूमि को रक्तरंजित कर रही है और इसे किसी भी संवैधानिक संस्था की परवाह नहीं है। 

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