By अभिनय आकाश | Mar 25, 2026
अमेरिका और इजराइल की ओर से हमले के बाद से ही ईरान ने मिडिल ईस्ट के उन देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। ईरान की ओर से इन देशों पर हमले अब भी बदस्तूर जारी हैं। ईरान ने जिन देशों में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं उनके पास भी मजबूत सैन्य ताकत है। हालांकि इन देशों ने अभी तक ईरान पर पलटकर हमला नहीं किया। इन देशों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई, क़तर, तुर्की और अज़रबैजान शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इनमें कई शिया देश भी शामिल हैं। जहां शिया मेजॉरिटी में हैं। वहीं ईरान की पहचान एक शिया लीडर देश के तौर पर होती रही है। ऐसे में सवाल उठता है आखिर ईरान सुन्नी देशों के साथ-साथ शिया मुल्कों को भी क्यों कर रहा है टारगेट?
तीसरा शिया देश है अज़र बैजान जहां पर ईरान जमकर हमले कर चुका है। अज़र-बैजान के नक्शीवान स्वायत्त गणराज में ईरानी सीमा से ड्रोन हमले किए गए। जिससे नक्शीवान, हवाई अड्डे और नागरिकों को नुकसान पहुंचा है। आपको बताते चल अज़रान के रिश्ते अमेरिका से कुछ खास मजबूत नहीं है। लेकिन अज़र-बैजान इजराइल का एक ऑलवेदर फ्रेंड है। इजराइल अज़र-बैजान से गैस और तेल खरीदता है। वहीं अज़र-बैजान इजराइल से हथियार लेता है। एक शिया देश होने के बावजूद अज़रबैजान के संबंध ईरान से सीमा विवाद के चलते तनावपूर्ण रहे हैं। दरअसल इन शिया देशों पर ईरान इसलिए हमले कर रहा है क्योंकि यह देश अमेरिका और इजराइल के मजबूत अलय हैं। वहीं भारत की बात करें तो भारत में भी ठीक-ठाक शिया आबादी रहती है। यह ज्यादातर यूपी, नॉर्थ कश्मीर और लद्दाख में है। भारत में शियाओं का एक बड़ा तबका इस युद्ध में ईरान को समर्थन करता हुआ नजर आया है। हालांकि इस युद्ध को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोशिशें की जा रही हैं।