मार्च में बढ़ती गर्मी के बीच दिल्ली में अचानक बारिश क्यों हो रही है? IMD Weather Alert

By रेनू तिवारी | Mar 15, 2026

मार्च में बढ़ती गर्मी के बीच दिल्ली में अचानक बारिश क्यों हो रही है?

मार्च में दिल्ली में बारिश क्यों हो रही है?

पश्चिमी विक्षोभ (Western disturbances) कम दबाव वाले सिस्टम होते हैं जो भूमध्य सागर के ऊपर बनते हैं और ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होते हुए पूरब की ओर बढ़ते हुए भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचते हैं। ये आमतौर पर सर्दियों में उत्तरी पहाड़ों पर बारिश और बर्फबारी लाते हैं, लेकिन मार्च में एक के बाद एक इनके आने से नमी सामान्य से कहीं ज़्यादा मैदानी इलाकों तक पहुँच गई है। 'मौसम तक' के संस्थापक और 'किसान तक' के मौसम व्लॉगर देवेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि रविवार, 15 मार्च को जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है, और इसका असर मैदानी इलाकों तक भी फैल सकता है।

उन्होंने कहा, "तापमान में थोड़ी गिरावट आई है, और इसमें कुछ और गिरावट भी आ सकती है। मध्य प्रदेश, गुजरात, दक्षिण राजस्थान और महाराष्ट्र सहित कुछ जगहों पर गर्मी से राहत मिल सकती है।"

बारिश और ठंडा मौसम कब तक रहेगा?

IMD ने पुष्टि की है कि 17 मार्च की रात से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है, जिससे ठंडक का यह सिलसिला और आगे बढ़ सकता है। स्वतंत्र मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया ने बताया है कि हवा के बहाव में बदलाव (wind discontinuity) के कारण मार्च के मध्य से अप्रैल तक दक्षिण और पूर्वी भारत में मॉनसून से पहले की बारिश भी हो सकती है।

उनका मानना ​​है कि भारत कम से कम 15 से 20 अप्रैल तक भीषण लू (heatwave) से बचा रह सकता है; यह एक बड़ी राहत होगी, खासकर यह देखते हुए कि इस साल तापमान में बढ़ोतरी काफी पहले ही शुरू हो गई थी।

भारत के किन हिस्सों में बारिश होगी?

IMD ने काफी बड़े इलाके में बारिश की संभावना जताई है। असम में भारी से बहुत भारी बारिश होने की उम्मीद है, जबकि उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम, साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भी भारी बारिश हो सकती है।

जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए 15 से 19 मार्च के बीच आंधी और बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। इनमें से कई राज्यों में कुछ जगहों पर ओले गिरने की भी उम्मीद है।

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त्रिपाठी ने आगे बताया कि बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी के कारण ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में बादल छाए रहेंगे और हल्की बारिश होगी, जबकि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भी बारिश होने की संभावना है। पूर्वोत्तर राज्यों, जिनमें अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय शामिल हैं, में भारी बारिश हो सकती है।

क्या यह किसानों के लिए अच्छी खबर है?

पूरी तरह से नहीं। हालांकि तापमान में गिरावट से गेहूं, चना और सरसों जैसी खड़ी रबी फसलों पर नमी का दबाव कम होता है, लेकिन IMD ने कुछ गंभीर चिंताएं भी जताई हैं। मॉनसून से पहले होने वाली बारिश, जिसके साथ ओले और तेज़ हवाएं (जिनकी गति 50 से 60 kmph और कुछ इलाकों में 70 kmph तक हो सकती है) चल सकती हैं, बागवानी और खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, लोगों और मवेशियों को घायल कर सकती है, और बिजली व संचार लाइनों को हल्का या गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

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जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपने बागों और सब्जियों के खेतों में ओलों से बचाने वाले जाल (हैल नेट) का इस्तेमाल करें, और अपने मवेशियों को घर के अंदर ही रखें।

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