By अभिनय आकाश | May 14, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 15 मई को खाड़ी देश की यात्रा के दौरान भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यूएई यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। लेकिन पीएम मोदी जिस देश के दौरे पर जाने वाले हैं उसको लेकर एक बड़ा दावा किया गया है। भारत के दोस्त इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात की सीक्रेट यात्रा की थी।इस दावे के बाद एक राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है कि इज़राइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की गुप्त यात्रा की और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की। इस दावे को अबू धाबी ने तुरंत खारिज कर दिया। एक्स पर जारी बयान में नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि उन्होंने 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के दौरान संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा की, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद से हुई। बयान के अनुसार, इस यात्रा का सीधा राजनयिक प्रभाव पड़ा। प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने पोस्ट में कहा कि इस यात्रा से इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है।
इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बयान जारी करने के तुरंत बाद, यूएई ने इस दावे को खारिज कर दिया कि नेतन्याहू ने देश का दौरा किया था या किसी इजरायली प्रतिनिधिमंडल का बिना सूचना के स्वागत किया गया था। यूएई के विदेश मंत्रालय ने एक्स पर विस्तृत प्रतिक्रिया जारी कर अपना रुख स्पष्ट किया। मंत्रालय ने कहा कि यूएई इस बात की पुष्टि करता है कि इजरायल के साथ उसके संबंध सार्वजनिक हैं और सुप्रसिद्ध एवं आधिकारिक रूप से घोषित अब्राहम समझौते के ढांचे के भीतर संचालित होते हैं, न कि अपारदर्शी या अनौपचारिक समझौतों पर आधारित हैं। इसलिए, बिना सूचना के दौरे या गुप्त समझौतों से संबंधित कोई भी दावा पूरी तरह निराधार है, जब तक कि यूएई में संबंधित अधिकारियों द्वारा इसकी आधिकारिक घोषणा न की गई हो।