By मिताली जैन | Sep 11, 2026
जब बात वेट लॉस की होती है तो अक्सर लोग तरह-तरह के उपाय अपनाते हैं। इन्हीं में से एक है इंटरमिटेंट फास्टिंग। इसे वेट लॉस के लिए एक अच्छा तरीका माना जाता है, क्योंकि इससे आपके खाने की टाइमिंग सेट होती है और ब्लड शुगर रेग्युलेट करने में मदद मिलती है। साथ ही साथ, बार-बार इंसुलिन स्पाइक भी नहीं होता। लेकिन कुछ लोग इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं, लेकिन फिर भी उनका वजन कम नहीं होता।
इंटरमिटेंट फास्टिंग की सबसे बड़ी गलतफहमी यही है कि “16 घंटे नहीं खाया है, इसलिए बाकी 8 घंटों में जो चाहूं खा सकती हूं।” अगर आप इस अप्रोच के साथ इंटरमिटेंट फास्टिंग करेंगी तो वजन कभी कम नहीं होगा। दरअसल, इस स्थिति में खाने का समय भले ही कम हो गया, लेकिन दिनभर की कुल कैलोरी जरूरी नहीं कि कम हुई हो। याद रखें कि घड़ी से ज्यादा आपकी प्लेट भी मायने रखती है। फास्ट खोलते ही बहुत ज्यादा खा लेती हैं
इंटरमिटेंट फास्टिंग में लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है। ऐसे में अक्सर लोग अपनी ईटिंग विंडो खुलते ही बहुत कुछ एक साथ खा लेते हैं। जिससे एक छोटी-सी परेशानी पैदा होती है। आपने 16 घंटे फास्ट किया, लेकिन उसके बाद इतनी ज्यादा कैलोरी खा ली कि फास्टिंग से बना अंतर वहीं खत्म हो गया। इसलिए, फास्ट खोलते समय सीधे मिठाई, तला हुआ खाना या बहुत बड़ा भोजन लेने के बजाय हमेशा प्रोटीन, सब्जियां और फाइबर वाले भोजन से शुरुआत करें। इससे पेट भरने में मदद मिल सकती है और अगले भोजन में जरूरत से ज्यादा खाने की संभावना भी कम होगी।
ईटिंग विंडो में आप क्या खा रही हैं, यह बहुत अधिक मायने रखता है। अगर आप ईटिंग विंडो में ज्यादातर बिस्कुट, नमकीन, मिठाई, मैदा, तले हुए स्नैक्स और मीठे पेय ले रही हैं तो ऐसे में वजन कम करना काफी मुश्किल होगा। अपने हर मील में प्रोटीन का कोई स्रोत, पर्याप्त सब्जियां और संतुलित मात्रा में कार्बोहाइड्रेट तथा वसा रखने की कोशिश करें। इससे फास्टिंग को लंबे समय तक निभाना भी आसान हो सकता है।
- मिताली जैन