आखिर क्यों हितों के टकराव से भारतीय क्रिकेट को खतरा है !

By दीपक मिश्रा | Aug 09, 2019

भारतीय क्रिकेट में इन दिनों हितों का टकराव आम बात हो गई है। क्या सचिन, क्या गांगुली और क्या लक्ष्मण हर किसी से जवाब मांगे जा रहे हैं। लेकिन अब मामला टीम इंडिया के उस जेंटलमेन खिलाड़ी पर आ लटका है। जो भारतीय क्रिकेट की नींव मजबूत कर रहा है। यानि की टीम इंडिया के लिए फ्यूचर तैयार कर रहा है। द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के महान खिलाड़ियों में से एक तो है ही लेकिन इसके साथ ही वो इंडिया ए के कोच भी है। तो क्या ये मान लिया जाए कि भारतीय क्रिकेट में इस समय नींव मजबूत करने वाले व्यक्ति पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। क्या राहुल द्रविड़ जैसे जेंटलमेन पर इस तरह के सवाल उठाना सही है।

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इस मामले पर डीके जैन ने एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा कि “हां मैंने राहुल द्रविड़ को नोटिस जारी किया है। साथ ही उन्हें इस बात पर जवाब देने के लिए दो हफ़्तों का समय भी दिया है। उनके जवाब के आधार पर हम आगे ये तय करेंगे कि उनपर कोई कार्रवाई करनी है या नहीं। इसका मतलब यह है कि द्रविड़ को अब जवाब भेजना होगा या फिर डीके जैन के बुलावे पर उनके सामने हाज़िर होना होगा।

द्रविड़ के खिलाफ इस तरफ सवाल उठाने पर टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का गुस्सा भड़क उठा। गांगुली ने ट्वीटर पर ट्वीट करते हुए कहा कि भारतीय क्रिकेट में नया फैशन हितों का टकराव है। खबरों में बने रहने का सबसे अच्छा तरीका। भगवान भारतीय क्रिकेट की मदद करें। इसके अलावा हरभजन सिंह ने भी ट्वीटर पर अपना गुस्सा जाहिर किया। भारतीय क्रिकेट के इन दिग्गजों का गुस्सा होना जायज भी लगता है। ऐसा पहली बार नहीं है कि भारतीय क्रिकेट के किसी दिग्गज खिलाड़ी पर सवाल खड़े किए जा रहे है। इससे पहले भी संजीव गुप्ता ने हाल ही में सचिन तेंडुलकर के ख़िलाफ़ भी ऐसी ही शिकायतें की थीं। इसके अलावा उन्होंने बीसीसीआई  की क्रिकेट एडवाइज़री कमिटी के पैनल मेम्बर्स कपिल देव, अंशुमान गायकवाड और शांता रंगास्वामी के ख़िलाफ़ भी शिकायत की थी।

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क्रिकेट एडवाईज़री कमिटी में एक वक्त पर सचिन तेंडुलकर, सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण भी शामिल थे। इस मामले में लक्षमण और गांगुली को हितों के टकराव का दोषी पाया गया था। जबकि सचिन तेंडुलकर को क्लीन चिट मिल गयी थी क्योंकि वो किसी भी कमिटी का हिस्सा बनने के इच्छुक नहीं थे। 

जाहिर है भारतीय क्रिकेट के इन दिग्गज खिलाड़ियों पर हितों के टकराव की वजह से सवाल उठाना सही नहीं थे।ये वो खिलाड़ी है जो पैसे के लिए नहीं बल्कि इस खेल के भविष्य को सुधारने के लिए मेहनत करते है। ऐसे में अगर इनके उपर इस तरह नोटिस भेजे जाएंगे तो भविष्य में शायद भारतीय क्रिकेट को इनकी सुविधाएं मिलने में भी परेशानी आ जाएं। पहले सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी के उपर हितों के टकराव की वजह से सवाल खड़े किए गए थे। जिसका खामियाजा बीसीसीआई को ही उठाना पड़ा था। क्योंकि सचिन ने अपने आपको एडवाइजरी कमिटी से हटा लिया था। अगर इस तरह के सवाल उस समय सचिन पर खड़े नहीं होते तो आज टीम इंडिया का दशा और दिशा में जरूर कुछ बदलाव हुए होते। इसके साथ ही सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण के उपर भी हितों का टकराव को लेकर विवाद खड़ा किया गया था। सौरव और वीवीएस दोनों ही आईपीएल की टीमों के साथ मेंटर की भूमिका में जुड़े हुए है। इसके साथ ही ये दोनों कमेंट्री भी करते है। लेकिन सवाल यह है कि अगर भारतीय क्रिकेट को ऊंचाई पर ले जाने या फिर किसी खास तरह की जरूरत है तो ये खिलाड़ी क्यों मदद नहीं कर सकते है। जिस तरह से द्रविड़ को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे है। उसे द्रविड़ को इन सबका जवाब देना ही पड़ेगा या फिर इसका को हल निकालना होगा। भारतीय क्रिकेट इस समय द्रविड़ जैसे हीरे को नहीं जाने दे सकता है। द्रविड़ टीम इंडिया के युवा खिलाड़ियों को तराश रहे है। जिस तरह से वो युवा खिलाड़ियों को सीनियर लेवल पर खेलने के लिए तैयार कर रहे है। उनके जैसा कोई भी करने में नाकाम है। इसलिए उम्मीद की जा रही है। भारतीय क्रिकेट में हितों के टकराव वाले मामले में जल्द ही कोई सुधार लाया जाएगा। जिसकी वजह से भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों को लेकर आगे कोई सवाल नहीं खड़े हो।

- दीपक मिश्रा

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