क्यों भारत का ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम विश्व के लिए है विकास का मॉडल

By रतीश कुमार झा | Jun 16, 2021

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम (एडीपी) को संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व के अन्य देशों में भी मॉडल के तौर पर अपनाने की वकालत की है। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने अपनी एक रिपोर्ट में एडीपी की प्रशंसा करते हुये स्थानीय क्षेत्र विकास के लिए बहुत ही सफल मॉडल बताया है और कहा है कि यह उन देशों के लिए “सर्वोत्तम अभ्यास” हो सकता है जहां विभिन्न वजहों से विकास के मामले में व्यापक क्षेत्रीय असमानताएं विद्यमान हैं।

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क्या है एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम ?


विकास की दौड़ में पिछड़ गये देश के विभिन्न जिलों पर से ‘पिछड़ा जिला’ का दाग हटाकर उन्हें विकास के विभिन्न प्रतिमानों पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2018 में ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट’ कार्यक्रम (आकांक्षी जिला कार्यक्रम) का शुभारंभ किया था। नीति आयोग को इस कार्यक्रम के संचालन का जिम्मा दिया गया है। राज्य सरकारों के सहयोग से देश के 28 राज्यों के 115 जिलों की पहचान की गई हैं जो मुख्यतः बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में हैं।


उपर्युक्त कार्यक्रम विकास के पांच मुख्य क्षेत्रों पर बल देता है। ये हैं; स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, कृषि एवं जल संसाधन, बुनियादी ढांचा तथा कौशल विकास एवं वित्तीय समावेशन। इन जिलों की वास्तविक समय पर डैशबोर्ड पर निगरानी की जाती है। इन प्रतिमानों पर इन जिलों की रैंकिंग भी जारी की जाती है ताकि विकास के मामले में ये प्रतिस्पर्धा बनी रहे।  


क्या है यूएनडीपी का आकलन ?


यूएनडीपी ने उपर्युक्त क्षेत्रों पर ही पहचाने गये जिलों की समीक्षा की। समीक्षा के अनुसार एडीपी की वजह से न केवल इन जिलों में विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति हासिल हुयी बल्कि शासन एवं प्रशासन में भी सुधार देखा गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्व निर्धारित संकेतकों की वजह से जिला प्रशासन को विभिन्न लक्ष्यों एवं सेक्टर्स पर विशेष बल देने का अवसर मिला। यही नहीं रिपोर्ट में कहा गया है कि एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट कार्यक्रम ने विकास के लिए उत्प्रेरक के रूप में कार्य किया और गैर-एस्पिरेशनल जिलों से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया।


यूएनडीपी ने अपनी समीक्षा में जो सुधार दर्ज किये, उनमें कुछ निम्नलिखित हैं:


-घरों पर होने वाली डिलिवरी के 9.6 प्रतिशत अधिक मामलों में एक प्रशिक्षित दाई की संलग्नता पई गई,


-गंभीर एनिमिया वाली 5.8 प्रतिशत अधिक गर्भवती महिलाओं का इलाज किया गया,


-डायरिया से पीड़ित 4.8 प्रतिशत अधिक बच्चों का इलाज किया गया,


-4.5 प्रतिशत अधिक गर्भवती महिलाओं ने अपनी पहली तिमाही में प्रसवपूर्व देखभाल के लिए पंजीकरण करवाया,


-प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना और प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत क्रमशः 406 एवं 847 अधिक नामांकन हुए और प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 1,580 अधिक खाते खोले गए।

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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा


यूएनडीपी ने अपनी रिपोर्ट में इस कार्यक्रम के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की है और कहा है कि एडीपी की सफलता में इनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2018 में कार्यक्रम के आरंभ के समय से ही प्रधानमंत्री ने चयनित जिलों के जिलाधिकारियों को फील्ड स्तर पर अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है।


एडीपी कार्यक्रम के पीछे प्रधानमंत्री का ‘सबका साथ सबका विकास’ का मंत्र काम कर रहा है ताकि विकास के दौड़ में सबको आगे बढ़ने का मौका मिले। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सतत विकास लक्ष्य का सिद्धांत ‘किसी को भी पीछे नहीं छोड़े’ भी प्रत्यक्ष तौर पर इसी की वकालत करता है।


-रतीश कुमार झा

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