By नीरज कुमार दुबे | Mar 04, 2026
भारत में इजराइल के राजदूत रुवेन अजर ने ईरान पर हाल में किए गए हमलों के समय और परिस्थितियों को लेकर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजराइल यात्रा के दौरान तय नहीं की गई थी। उनके अनुसार उस समय ऐसी किसी कार्रवाई की स्पष्ट योजना नहीं थी और यह कदम बाद में परिस्थितियों के आधार पर उठाया गया।
राजदूत के अनुसार जब प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा पूरी कर भारत लौट चुके थे, तभी इजराइल को एक ऐसा सैन्य अवसर दिखाई दिया, जिसे उपयुक्त मानते हुए कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सैन्य अभियानों की योजना कई बार बहुत कम समय में बनाई जाती है और यह पूरी तरह परिस्थितियों पर निर्भर करती है। इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान ही ईरान पर हमले का निर्णय ले लिया गया था।
हम आपको याद दिला दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इजराइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की थी। इस दौरान उन्होंने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ विस्तृत बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच सुरक्षा, तकनीक, कृषि, नवाचार और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौते भी हुए, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करना है।
मोदी की यात्रा के कुछ ही समय बाद पश्चिम एशिया में तनाव अचानक बढ़ गया। इजराइल और अमेरिका से जुड़ी सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के खिलाफ हमला किया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया। इस घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया और कई देशों ने क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंता जताई।
रुवेन अजर ने कहा कि ईरान के साथ लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण इजराइल लगातार अपनी सैन्य और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करता रहा है। ईरान की गतिविधियों और उसकी रणनीतियों को समझने के लिए इजराइल ने अपनी खुफिया प्रणाली को काफी उन्नत बनाया है। इसके साथ ही आधुनिक हथियार प्रणालियों और सुरक्षा तकनीकों में भी भारी निवेश किया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। अब केवल पारंपरिक हथियारों से ही नहीं बल्कि आधुनिक तकनीक, उन्नत रक्षा प्रणालियों और नई वैज्ञानिक क्षमताओं के माध्यम से भी सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। मिसाइल रक्षा प्रणाली और लेजर आधारित सुरक्षा तकनीक जैसे उपायों के जरिये हमलों को रोकने की क्षमता विकसित की जा रही है।
राजदूत ने बताया कि इजराइल ने अपने मित्र देशों के साथ सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को साझा किया है। भारत के साथ भी इस विषय पर संवाद जारी है। उनके अनुसार इजराइल मानता है कि ईरान की सैन्य और परमाणु गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकती हैं, इसलिए इस विषय पर सतर्क रहना जरूरी है।
बहरहाल, ईरान पर हमले और प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद पैदा हुई परिस्थितियों ने पश्चिम एशिया की जटिल राजनीति को फिर से चर्चा में ला दिया है। हालांकि इजराइल के राजदूत ने स्पष्ट किया है कि यह सैन्य कार्रवाई प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से जुड़ी कोई पूर्व निर्धारित योजना नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार लिया गया निर्णय था।