By अभिनय आकाश | May 17, 2025
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बीआर गवई ने जस्टिस बेला एम त्रिवेदी के लिए सामान्य विदाई समारोह आयोजित न करने के सुप्रीम कोर्ट बार असोसिएशन के फैसले की निंदा की। जस्टिस गवई ने कहा कि जज कई तरह के होते हैं। कुछ ऐसे होते हैं जो राहत देते हैं। कुछ ऐसे होते हैं जो राहत नहीं देते। वे आखिरकार इंसान ही होते हैं। हर किसी के अलग-अलग विचार होते हैं, लेकिन असोसिएशन के अपनाए गए रुख की मैं खुले तौर पर निंदा करता हूं, क्योंकि मैं साफ और सीधी बात कहने में विश्वास करता हूं। असोसिएशन को ऐसा रुख नहीं अपनाना चाहिए था। सीजेआई ने इस बात की भी सराहना की कि बार के प्रस्ताव के बावजूद उसके अध्यक्ष कपिल सिब्बल और अन्य पदाधिकारी वहां मौजूद रहे। जस्टिस बेला सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 11वीं महिला जस्टिस हैं। वह 9 जून को रिटायर हो रही हैं, लेकिन उन्होंने कुछ वजहों ने 16 मई को अपना आखिरी कार्यदिवस चुना।
जिला जज से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी ने जुलाई 1995 में गुजरात की एक निचली अदालत के जज के रूप में शुरुआत की। उनके पिता भी इसी कोर्ट में तब जज थे। वह 7 जजों की उस संविधान पीठ में भी थीं जिसने अगस्त 2024 में 6:1 के बहुमत से माना कि राज्यों को SC कैटिगरी के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है। जस्टिस त्रिवेदी ने असहमति जताई थी।