By अभिनय आकाश | Oct 28, 2026
अब तक पूरी दुनिया की जुबान पर एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस नाम का शब्द चढ़ चुका है। लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने एआई का नाम बदलकर एसआई यानी सुपर इंटेलिजेंस कर दिया है। यानी अब वो चाहते हैं कि इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ना कहा जाए क्योंकि ये आर्टिफिशियल नहीं है। इसका नाम होना चाहिए सुपर इंटेलिजेंस। वो कहते हैं कि आर्टिफिशियल नहीं बल्कि सुपर इंटेलिजेंस चाहिए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी संबंधित संघीय सरकारी दस्तावेजों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AI शब्द के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की योजना का ऐलान किया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए ट्रंप ने मीडिया आउटलेट द वॉल स्ट्रीट जर्नल पर सवाल उठाए और तर्क दिया कि इस उन्नत तकनीक की क्षमताओं को दर्शाने के लिए ‘सुपर इंटेलिजेंस’ शब्द अधिक सटीक है। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में लिखा द वॉल स्ट्रीट जर्नल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)—जो कि एक बेहद खराब और गलत नाम है। उसको SI (सुपर इंटेलिजेंस) कहना कब शुरू करेगा? यह वही नाम है जिसे लगभग हर कोई इस्तेमाल कर रहा है या जल्द ही करने वाला है। उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में लिखा हम बहुत जल्द इसके गलत और भ्रामक होने की वजह से सभी प्रासंगिक दस्तावेजों और अन्य सभी जगहों पर ‘AI/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ शब्द के इस्तेमाल को आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से प्रतिबंधित (BAN) करने जा रहे हैं। इस मामले पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद।
इस कार्यकारी आदेश में कहा गया है कि तकनीक में हुई प्रगति अब उस मूल ढांचे से कहीं आगे निकल गई है, जिसका इस्तेमाल 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) को परिभाषित करने के लिए किया जाता था। इसमें तर्क दिया गया है कि आज के उन्नत सिस्टम केवल मानवीय बुद्धिमत्ता के कुछ पहलुओं की नकल करने या उन्हें स्वचालित (ऑटोमेट) करने से कहीं अधिक काम करते हैं। आदेश के अनुसार, ये सिस्टम विज्ञान और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में मानवीय रचनात्मकता और क्षमताओं का लगातार विस्तार कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि 'सुपर इंटेलिजेंस' शब्द इन विकासों को बेहतर ढंग से दर्शाता है। एक नई कानूनी परिभाषा का भी प्रस्ताव रखा गया है। इस आदेश के तहत, राष्ट्रपति के विज्ञान और प्रौद्योगिकी सहायक को 60 दिनों के भीतर कांग्रेस के सामने प्रस्तावित कानूनी भाषा पेश करने के लिए कहा गया है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य 'सुपर इंटेलिजेंस' की एक आधिकारिक कानूनी परिभाषा तय करना और मौजूदा कानूनों में बदलाव की सिफारिश करना है।
यह कदम तब उठाया गया जब ट्रंप ने व्हाइट हाउस में प्रमुख टेक्नोलॉजी अधिकारियों के साथ तकनीकी विकास और एडवांस्ड सिस्टम के सुरक्षित विकास पर चर्चा की। इस चर्चा में शामिल टेक लीडर्स में एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग, सुंदर पिचाई और जेन्सेन हुआंग शामिल थे। ट्रंप ने इस सेक्टर की ग्रोथ को अभूतपूर्व बताया, जबकि इंडस्ट्री लीडर्स ने सहयोग और सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया। शब्दावली में प्रस्तावित यह बदलाव, अमेरिकी सरकार द्वारा अपने संघीय कार्यों में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को परिभाषित करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा।
क्या गारंटी है कि यह जो सुपर इंटेलिजेंस है या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है यह बनाए गए हमारे जो नियम हैं उन्हें नहीं तोड़ेगा? यह कंपनियों का डाटा चोरी नहीं करेगा? क्या गारंटी है कि इसका गलत इस्तेमाल नहीं होगा? क्या गारंटी है कि यह सुपर इंटेलिजेंस या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आपके और हमारे जो पासवर्ड्स हैं उन्हें नहीं चुरा लेगा? यह कुछ भी कर सकता है। किसी की भी हैकिंग कर सकता है। कहीं भी जाकर चोरी कर सकता है। कोई भी डाटा निकाल सकता है। अब इस पर नजर कौन रखेगा? और हमारे ऊपर और आपके ऊपर तो एक कानून है जिसके तहत हम काम करते हैं। अगर हम उस कानून को तोड़ते हैं तो अदालत में हम पर मुकदमा चल सकता है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अगर कुछ करता है तो किस पर मुकदमा चलेगा? अगर एक सेल्फ ड्राइविंग कार किसी की दुर्घटना कर देती है किसी के साथ तो फिर जब ड्राइवर ही नहीं है तो आप मुकदमा किस पर चलाएंगे?