क्या बिहार लौटेंगे चिराग पासवान? बोले- खुद को लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में नहीं देखता

By अंकित सिंह | Jun 02, 2025

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सोमवार को आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की संभावना की खबरों पर टिप्पणी की और स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता हमेशा बिहार और बिहारी रही है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पार्टी को जल्द ही राज्य की राजनीति में लौटने की अपनी इच्छा से अवगत कराया है। पासवान ने इस बात पर जोर दिया कि वह बिहार को एक विकसित राज्य के रूप में देखना चाहते हैं, जिसके बारे में उन्होंने कहा, “अगर मैं दिल्ली में हूं तो यह संभव नहीं है।”

चिराग पासवान ने कहा कि मेरी पार्टी अभी भी इस बात का मूल्यांकन कर रही है कि अगर मैं अभी विधानसभा चुनाव लड़ता हूं तो क्या मेरी पार्टी को फायदा होगा। अगर मेरा स्ट्राइक रेट बेहतर हुआ और मेरे गठबंधन का प्रदर्शन बेहतर हुआ, जिसकी संभावना बहुत ज़्यादा है, तो मैं ज़रूर चुनाव लड़ूंगा। बिहार में सीएम पद के लिए कोई वैकेंसी नहीं है। चुनाव के बाद नीतीश कुमार ही सीएम बनेंगे। बिहार में चुनावी माहौल के बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के इस साल अक्टूबर-नवंबर में होने वाले विधानसभा चुनाव लड़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। 

पार्टी नेता और सांसद अरुण भारती ने अब सार्वजनिक रूप से इस कदम का समर्थन किया है और इसे जमीनी स्तर से सामूहिक मांग बताया है। अरुण भारती ने एक्स पर लिखा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान हमेशा कहते हैं कि उनकी राजनीति बिहार केंद्रित है और उनका विजन “बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट” एक विकसित और आत्मनिर्भर बिहार का संकल्प है। यह तभी संभव है जब वे खुद बिहार में रहकर नेतृत्व करें।

अरुण भारती ने आगे लिखा कि जब मैं प्रदेश प्रभारी के रूप में गांव-गांव गया, हर जगह लोगों की एक ही मांग थी कि चिराग जी को अब बिहार में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। हाल ही में पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में भी सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास हुआ कि वे आगामी विधानसभा चुनाव में खुद चुनाव लड़ें। साथ ही साथ, कार्यकर्ताओं की यह भी भावना है कि इस बार वे किसी आरक्षित सीट से नहीं, बल्कि एक सामान्य सीट से चुनाव लड़ें — ताकि यह संदेश जाए कि वे अब सिर्फ एक वर्ग नहीं, पूरे बिहार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं।

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उन्होंने लिखा कि चिराग पासवान आज सिर्फ प्रतिनिधि नहीं, पूरे बिहार की उम्मीद हैं। उनका यह कदम सामाजिक न्याय की राजनीति को एक नई दिशा देगा — जिसमें प्रतिनिधित्व के साथ-साथ सर्वमान्यता की भी लड़ाई लड़ी जाएगी। भारती ने यह भी लिखा कि जब नेता पूरे बिहार का है, तो सीट का दायरा क्यों सीमित हो? कार्यकर्ताओं की यह भी भावना है कि इस बार चिराग पासवान बिहार विधानसभा के चुनाव में किसी आरक्षित सीट से नहीं, बल्कि एक सामान्य सीट से चुनाव लड़ें - चिराग पासवान अब सिर्फ़ एक समुदाय की नहीं, पूरे बिहार की उम्मीद हैं।

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