By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jun 02, 2022
टोरंटो। (द कन्वरसेशन) संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) ने हाल में जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि दुनियाभर में संघर्षों, हिंसा, मानवाधिकारों के हनन और जुल्म की वजह से 10 करोड़ से ज्यादा लोग विस्थापित हुए हैं। शरणार्थियों की चौका देने वाली यह संख्या यूक्रेन, अफगानिस्तान, सीरिया, दक्षिण सूडान, म्यांमा और सोमालिया में जंग की वजह से है। फरवरी में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद से पूर्वी यूरोपीय देश से बड़े पैमाने पर लोगों का पलायन हुआ है। यूक्रेन से 66 लाख से ज्यादा लोग भाग चुके हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। 18-64 साल की उम्र के लोगों का देश में ही रहना जरूरी है ताकि वे रक्ष बलों की मदद कर सकें।
पूर्ववर्ती यूगोस्लाविया के विघटन से जुड़े युद्धों के कारण 1991 से 2001 के बीच 24 लाख से ज्यादा लोगों को शरणार्थी बनना पड़ा। यह देश बाद में टूटा और इसके टुकड़े होकर क्रोएशिया, सर्बिया, स्लोवेनिया, कोसोवो और बोस्निया देश बने। यूक्रेन के अधिकतर लोग पौलेंड में गए हैं, लेकिन हंगरी, रोमानिया, स्लोवाकिया और माल्डोवा तक में शरणार्थी पहुंचे हैं। यूक्रेन के कुछ लोग कनाडा, अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी जैसे अन्य मुल्कों में भी गए हैं। यूक्रेनियन विस्थापित हैं या फंसे हुए हैं यूएनएचसीआर ने अनुमान जताया है कि यूक्रेन में 70 लाख से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए हैं, खासकर वे लोग जो पूर्वी यूक्रेन में भीषण लड़ाई से बचकर पश्चिमी शहर ल्वीव गए हैं और राजधानी कीव की घेराबंदी के दौरान बच कर भागे हैं।
शरणार्थी हुए और देश में ही विस्थापित हुए लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी का एक चौथाई है। अपने तबाह हुए घरों और समुदायों में अब भी बहुत से लोग फंसे हुए हैं। इसका मतलब है कि वे बिना घर-बार छोड़े ही विस्थापित हो गए हैं। हालांकि इस तरह की खबरें हैं कि लोग यूक्रेन के कुछ इलाकों में लौट रहे हैं, क्योंकि रूसी बलों ने उन इलाकों को छोड़ दिया है। यूक्रेन की 4.4 करोड़ की आबादी को देखते हुए, इस बात की आशंका है मौजादू संघर्ष के कारण शरणार्थियों की संख्या द्वितीय विश्व युद्व के दौरान हुए पलायन को पार कर जाए।