By अभिनय आकाश | Sep 07, 2026
मिडिल ईस्ट जल रहा है। रूस यूक्रेन युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है और इन सबके बीच भारत की धड़कनें तेज हैं। क्योंकि हम अपनी जरूरत का 89% तेल विदेशों से मंगाते हैं। अगर कल सप्लाई रुक गई तो भारत थम जाएगा। आपने अक्सर सुना होगा कि राजस्थान की रेतीली जमीन पर जीवन जीना कितना कठिन है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही तपता हुआ थार रेगिस्तान आने वाले समय में भारत की एनर्जी सिक्योरिटी यानी ऊर्जा सुरक्षा का सबसे बड़ा किला बनने जा रहा है। एक ऐसी जगह जहां पानी मिलना मुश्किल था। वहां अब काला सोना यानी क्रूड ऑयल उबल रहा है। भारत को अपनी रफ्तार बनाए रखने के लिए हर दिन लगभग 50 लाख यानी 5 मिलियन बैरल कच्चे तेल की जरूरत होती है। लेकिन कड़वा सच यह है कि हम अभी अपनी जरूरत का 85% हिस्सा विदेशों से आयात करते हैं। चाहे वह मिडिल ईस्ट के देश हो या रूस के। हाल ही में हमने देखा कि स्टेट ऑफ हॉर्मोज में तनाव की वजह से वैश्विक तेल सप्लाई कितनी बुरी तरह प्रभावित हुई है। दुनिया का 1/5 हिस्सा तेल और गैस इसी रास्ते से आता है। जब भी वहां कोई संकट आता है भारत की इकॉनमी पर दबाव बढ़ जाता है। रूस पर लगे प्रतिबंधों ने सप्लाई चेन को अनिश्चित बना दिया।
इसमें जमीन की गहराई में बेहद गर्म भाप भेजी जाती है। इसमें जमा हुआ तेल पिघल जाता है और उसे पंप करना आसान हो जाता है। जैसलमेर में इस तकनीक का ट्रायल इतना सफल रहा कि वहां उत्पादन में 70% की बढ़ोतरी देखी गई। अब यही फार्मूला पूरे राजस्थान के तेल क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है। सिर्फ तेल निकालना काफी नहीं होता है दोस्तों। उसे साफ करना यानी रिफाइन करना बहुत जरूरी है और अभी तक यह तेल टैंकरों के जरिए गुजरात की कोयाली रिफाइनी भेजा जाता था। लेकिन अब खेल बदलने वाला है। राजस्थान के बाड़मेर में एचपीसीएल द्वारा एक विशाल रिफाइनरी बनाई जा रही है।