ममता के गढ़ भवानीपुर में भी नंदीग्राम वाला इतिहास दोहराएगा? ये हुआ तो बंगाल चुनाव का पूरा गेम ही बदल जाएगा

By अभिनय आकाश | Mar 03, 2026

मशहूर क्रिकेटर और वर्ल्ड कप विजेता टीम के कप्तान कपिल देव ने कहा था कि वेन यू टेस्ट सक्सेस, योर टंग वांट मोर यानी एक बार सफलता का स्वाद चख लो, तो जीभ (मन) और अधिक मांगती है। कोई खिलाड़ी जो अप्रत्याशित रूप से एक अधिक मजबूत प्रतिद्वंद्वी को हरा देता है तो उसे जायंट किलर कहा जाता है। राजनीति में भी ऐसे ही नाम हैं।  साल 2019 के लोकसभा चुनाव में सुब्रत पाठक कन्नौज में डिंपल यादव को हराया। स्मृति ईरानी जिन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी में हराया। केपी यादव ने गुणा में ज्योतिरादित्य सिंधिया को मात दी थी। दिल्ली के पूर्व सीएम आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल को बीजेपी नेता प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने हार का स्वाद चखाया। लेकिन एक ऐसे ही जायंट किलर जिन्होंने 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ने नंदीग्राम से चुनाव लड़कर शिकस्त दी। वो नाम टीएमसी से उसी साल बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी का है। लेकिन पांच साल बाद, संकेत मिल रहे हैं कि शुभेंदु 2026 के चुनाव में ममता के कोलकाता स्थित गढ़ भाबनीपुर से उन्हें चुनौती दे सकते हैं। कभी घनिष्ठ सहयोगी रहे इन दोनों ने नंदीग्राम आंदोलन में साथ काम किया था। ममता के साथ मिलकर सीपीआई (एम) को सत्ता से बेदखल किया था और 2011 में तृणमूल कांग्रेस के उदय का मार्ग प्रशस्त किया। 2021 के चुनावों से ठीक पहले अधिकारी के भाजपा में शामिल होने के साथ ही दोनों के रिश्ते में दरार आ गई। नीतजतन नंदीग्राम में एक रोमांचक मुकाबले का मंच तैयार हो गया। फिर क्या था वो सीट जो तृणमूल की सफलता का प्रतीक थी, वहां उसकी सबसे बड़ी नेता की हार की कहानी लिखी गई। 

इसे भी पढ़ें: West Bengal में गरजे Amit Shah, बोले- 'TMC को वोट दिया तो दीदी नहीं, भाईपो राज करेंगे'

क्या भवानीपुर सीट पर एसआईआर का प्रभाव दिखेगा?

भवानीपुर में भाजपा के लिए आत्मविश्वास का एक प्रमुख स्रोत पश्चिम बंगाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के परिणाम रहे हैं। एसआईआर प्रक्रिया के परिणामस्वरूप 6 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 6 लाख नाम अभी भी विचाराधीन हैं। हालांकि इन सभी नाम हटाए जाने से राज्य की सभी सीटें प्रभावित हुईं, लेकिन कुछ सीटें दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित हुईं। इनमें से एक सीट भाबनीपुर है। एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची से पता चलता है कि इस सीट से कम से कम 47,000 नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 14,154 नामों पर अभी भी विचार चल रहा है। इनमें से एक सीट भाबनीपुर है। एसआईआर की अंतिम मतदाता सूची से पता चलता है कि इस सीट से कम से कम 47,000 नाम हटा दिए गए हैं, जबकि 14,154 नामों पर अभी भी विचार चल रहा है। नतीजतन, ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर में, जहां 267 बूथ हैं, अंतिम सूची में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2,06,295 से घटकर 1,59,201 हो गई। वहीं, सुवेंदु की सीट नंदीग्राम में 2,78,212 मतदाताओं में से 10,599 नाम हटाए गए। तब से, कई भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि बनर्जी 2026 में अपना पुराना गढ़ खो देंगी।

इसे भी पढ़ें: West Bengal Voter List से 50 लाख 'घुसपैठियों' का सफाया, BJP नेता नितिन नवीन का बड़ा दावा

शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर में अपना वॉर रूम स्थापित किया

2011 से, भवानीपुर मुख्यमंत्री कार्यालय पर ममता बनर्जी की पकड़ का मजबूत गढ़ रहा है। हालांकि, 2014 के लोकसभा चुनावों से इस प्रभुत्व में दरारें दिखनी शुरू हो गईं, जब भाजपा ने इस निर्वाचन क्षेत्र के कई वार्डों में महत्वपूर्ण पैठ बनाई। भवानीपुर में वार्ड 63, 70, 71, 72, 73, 74, 77 और 82 शामिल हैं। 2014 के संसदीय चुनावों में, भाजपा उम्मीदवार तथागत रॉय ने इन वार्डों में तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार सुब्रता बख्शी को मात्र 176 वोटों के मामूली अंतर से हराया था। हालांकि रॉय बख्शी से हार गए, लेकिन भाजपा ने तब से इस प्रदर्शन को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया है कि भवानीपुर अब टीएमसी का अभेद्य गढ़ नहीं रहा। वार्ड स्तर पर इस रुझान से उत्साहित होकर, भाजपा अब भाबानीपुर को 2026 के विधानसभा चुनाव में एक संभावित निर्णायक सीट के रूप में पेश कर रही है। हालांकि, अहम सवाल यह है कि क्या सुवेंदु अधिकारी इस निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार के रूप में उभर सकते हैं। हाल के घटनाक्रमों और राजनीतिक संकेतों की एक श्रृंखला से संकेत मिलता है कि इस संभावना पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है, जिसके लिए गहन जांच की आवश्यकता है। भवानीपुर में भाजपा की मजबूत पैठ बनाने की उम्मीद का एक उदाहरण यह है कि सुवेंदु अधिकारी ने अपना वॉर रूम स्थापित करने के लिए इसी निर्वाचन क्षेत्र को चुना है। वार्ड 70 में चक्रबेरिया रोड (दक्षिण) स्थित 8/1B के एक मकान के भूतल पर यह विशेष वॉर रूम बनाया गया है। वार्ड 70 ही क्यों? इसका कारण एक बार फिर यही है कि 2014 में इसी वार्ड ने भाजपा को सबसे बड़ी बढ़त दिलाई थी।

शुभेंदु ने भाबनीपुर में ममता को हराने का वादा किया

2026 के चुनावों के लिए भाबनीपुर में भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवार को अंतिम रूप देने से पहले ही, पार्टी ने जमीनी स्तर पर काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत पूरे निर्वाचन क्षेत्र की दीवारों पर कमल के चिन्ह दिखाई दे रहे हैं। अटकलों को हवा देते हुए, भाजपा के पश्चिम बंगाल के पूर्व अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने सुवेंदु अधिकारी के लिए उम्मीदवारी की संभावना को खुला रखा है। इस मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए सुकांत ने कहा कि अगर ममता बनर्जी भाबनीपुर से चुनाव लड़ती हैं, तो पार्टी तय करेगी कि उनके सामने कौन होगा। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी को लगता है कि सुवेंदु सही उम्मीदवार हैं, तो वह चुनाव लड़ेंगे। इस तरह उन्होंने शुभेंदु अधिकारी के भवानीपुर से संभावित चुनाव लड़ने की अटकलों को और बल दिया।

शुभेंदु ने खुद इस बात को और पुख्ता कर दिया है। जनसभाओं से लेकर मीडिया से बातचीत तक, विपक्ष के नेता ने बार-बार दावा किया है, "मैंने उन्हें नंदीग्राम में हराया था; इस बार मैं उन्हें भाबनीपुर में भी हराऊंगा। मैं उन्हें 20,000 वोटों के अंतर से पूर्व मुख्यमंत्री बना दूंगा। इससे एक अहम सवाल खड़ा होता है: क्या ममता बनर्जी 2026 में भाबनीपुर से चुनाव लड़ेंगी, या क्या वह पिछली विधानसभा चुनाव की तरह फिर से सीट बदलेंगी? फिलहाल, भाजपा तृणमूल कांग्रेस पर कड़ी नजर रख रही है। अगर 2021 के चुनाव में नंदीग्राम ममता-सुवेंदु के बीच कांटे की टक्कर का केंद्र था, तो क्या 2026 में भाबनीपुर सबसे चर्चित सीट बन जाएगी? इस बारे में चर्चा तेज होती जा रही है।

प्रमुख खबरें

Vanakkam Poorvottar: कोई क्षेत्र नहीं खोया है, सभी पोस्ट भारतीय नियंत्रण में हैं, Arunachal Pradesh में चीनी घुसपैठ की खबरों पर Indian Army का स्पष्टीकरण

नशे में Pilot! Air India Phuket-Delhi उड़ान के कैप्टन का डोप टेस्ट पॉजिटिव, बढ़ा दबाव

Shahi Kishmish Curry: घर पर झटपट बनाएं Shahi Kishmish Curry, हर कोई करेगा Delicious खाने की तारीफ

Monsoon Session: Kiren Rijiju बोले- 12 बिल पास, पर Debate न होने से दुखी