सबसे बड़ा रुपैया! अब नहीं चलेगी डॉलर की दादागिरी, INR दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी होने वाली है

By अभिनय आकाश | Jul 18, 2023

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस और यूएई के सफल दौरे से लौट कर आ गए हैं। लेकिन इस दौरे में दुनिया के 2 बड़े देशों के साथ भारत के आर्थिक समझौतों ने भारतीय रुपये की साख बढ़ा दी है। अब दुनिया में चर्चा हो रही है कि क्या भारत का रुपया दुनिया में ट्रेड के लिए डॉलर का विकल्प बन सकता है। क्या प्रधानमंत्री मोदी ने रुपये को और ज्यादा मजबूत करने का काम किया है। इस चर्चा के पीछे भारत और यूएई के बीच हुआ गेम चेंजर समझौता है। जिसके मुताबिक अब भारत और यूएई अब डॉलर में नहीं बल्कि रुपये और दिरहम में व्यापार करेंगे। इसके अलावा श्रीलंका के राष्ट्रपति विक्रम सिंह ने एक बयान देकर श्रीलंका के व्यापार को भी भारतीय रुपये में करने का संकेत दिया है। श्रीलंका भारतीय रुपये का इस्तेमाल अमेरिकी डॉलर के बराबर देखना चाहेगा। अब लाख टके का सवाल यह उठता है कि क्या भारतीय रुपया मजबूत हो रहा है और क्या यह अमेरिकी डॉलर के प्रभुत्व को सीधी चुनौती है।

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में कुछ समझौते ऐसे हुए हैं जिसकी चर्चा दुनिया में हो रही है। बातें हो रही हैं कि क्या अब रुपया डॉलर के मुकाबले खड़ा होने वाला है। सबसे पहले हम आपको बताते हैं कि यूएई के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने कौन सी गेम चेंजर डील की है। दुनिया के सबसे अमीर मुल्कों में जिस देश की गिनती होती है। उस देश के साथ भारत अब रुपया में व्यापार करेगा। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने अबू धाबी में इस बात का ऐलान किया। खुद प्रधानमंत्री मोदी मान रहे हैं कि ये डील वर्ल्ड ऑर्डर को नया आकार देने की क्षमता रखती है। इस डील के बाद डॉलर से रुपये में बदलने की लागत खत्म हो जाएगी। दोनों देशों की मुद्राओं को लाभ पहुंचेगा। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार बढ़ेगा। दोनों देशों के निवेश का आधार भी मजबूत होगा। यूएई में लगभग 30 लाख भारतीय काम करते हैं, जो भारत में अपने परिजनों को पैसा भी भेजते हैं। रुपये में ट्रेड से पैसा भेजने की लागत भी कम हो जाएगी। इसके अलावा भारत के यूपीआई और यूएई के आईपीपी को भी जोड़ने पर सहमति बनी है। 

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कई देशों के साथ इस तरह की व्यवस्था बनाने पर काम

भारत द्वारा की जा रही ये एक व्यापक कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत कई देशों के साथ इस तरह की व्यवस्था बनाने पर काम किया जा रहा है। इसी महीने भारत और बांग्लादेश के बीच रुपये में व्यापार शुरू भी कर दिया गया। रूस के साथ रुपये में व्यापार करने की कोशिशें कई महीनों से चल रही है। साझेदार देश के बैंकों को भारतीय बैंकों में विशेष खाते खोलने होते हैं। आयातक भुगतान के लिए इन विशेष खातों में रुपये जमा करेंगे। इन खातों में जो बैलेंस पड़ा रहेगा उसका इस्तेमाल भारतीय निर्यातकों को भुगतान करने के लिए किया जाएगा। मिसाल के तौर पर बांग्लादेश के साथ इस व्यवस्था के लिए आरबीआई ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई बैंक को और बांग्लादेश बैंक ने सोनाली बैंक और ईस्टर्न बैंक को एक दूसरे बैंक को एक दूसरे के साथ विशेष खाते खोलने की अनुमति दे दी है। 

इंटरनेशनल करेंसी क्या होती है

बैंक फॉर इंटरनैशनल सेटलमेंट्स (BIAS) के मुताबिक, जिस मुद्रा का इस्तेमाल जारी करने वाले देश की सीमाओं के बाहर भी किया जाता है, वह इंटरनैशनल करंसी होती है। अमेरिका जाहिर तौर पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। उसकी करंसी डॉलर दुनिया की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में से एक है। लेकिन यह इकलौती इंटरनैशनल करंसी नहीं। चीन का युआन भी काफी महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मदा है जिसे कई देशों ने अपनाया है। RBI भी रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण करते समय इन दोनों करंसी से काफी कुछ सीखने की योजना बना रहा है। रिजर्व बैंक ने रुपये को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने की संभावनाओं के बारे में पता लगाने के लिए एक इंटर-डिपार्टमेंटल ग्रुप (IDG) बनाया था। इसने पिछले साल अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसे अब आरबीआई की साइट पर डाल दिया गया है।

रुपए की सीमाएं

इंटर-डिपार्टमेंटल ग्रुप का मानना है कि रुपये में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनने की क्षमता है, क्योंकि भारत बड़ी और मजबूत अर्थव्यवस्था है। देश की इकॉनमी लगातार बढ़ रही है। रुपये ने मुश्किल हालात में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। भारत ने उन मामलों में भी काफी तरक्की की है, जो किसी देश की करंसी को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बनाने के लिए जरूरी होते हैं। IDG के मुताबिक, लंबी अवधि में अन्य देशों के साथ भारत के व्यापारिक संबंध भी और बेहतर होंगे। ऐसे में रुपया आसानी से उस स्तर तक पहुंच सकता है, जहां इसका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा के रूप में किया जाए। 

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भारत के अलावा और कहां कहां चलता है रुपया

रुपया सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि कई और देशों की भी मुद्रा है। हालांकि इनमें हर देश में रुपये की कीमत डॉलर के मुकाबले अलग-अलग है। श्रीलंका की मुद्रा का नाम भी रुपया ही है। 1 जनवरी 1872 को रुपया को वहां की आधिकारिक मुद्रा घोषित किया गया। भारत के पड़ोसी देश नेपाल में 1932 में रुपया को आधिकारिक मुद्रा बनाया गया। मॉरिशिस में पहली बार 1877 में नोट छापे गए। वहां भारतीय मूल के लोगों की संख्या ज्यादा है। इसलिए नोट पर भी उसका मूल्क भोजपुरी और तमिल भाषा में दर्ज होता है। 

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