Prabhasakshi NewsRoom: क्या चुनाव से चार महीने पहले Hemant Soren को मिली जमानत Jharkhand की राजनीति में बड़ा बदलाव लायेगी?

By नीरज कुमार दुबे | Jun 29, 2024

झारखंड में इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य में सत्तारुढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा को तब नई ताकत मिल गयी जब पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पांच महीने जेल में बिताने के बाद जमानत मिलने पर बाहर आ गये। आज राजधानी रांची में हेमंत सोरेन के समर्थन में जो पोस्टर लगे हैं वह दर्शा रहे हैं कि झारखंड मुक्ति मोर्चा का जोश कितना हाई है। हम आपको याद दिला दें कि हेमंत सोरेन के जेल जाने के समय माना जा रहा था कि उनकी पार्टी के विधायक टूट जायेंगे और राज्य सरकार गिर जायेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। जेल जाने से पहले हेमंत सोरेन जो राजनीतिक प्रबंधन करके गये थे वह कामयाब रहा। चंपई सोरेन मुख्यमंत्री के रूप में गठबंधन की सरकार सफलतापूर्वक चला रहे हैं और माना जा रहा है कि वह इस सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक पद पर बने रहेंगे। हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन भी अब राजनीतिक रूप से परिपक्व हो चुकी हैं क्योंकि अपने पति की अनुपस्थिति में उन्होंने पार्टी को भी संभाला और दिल्ली तथा झारखंड में हुई इंडिया गठबंधन की बैठकों में अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व किया, लोकसभा चुनावों में जमकर प्रचार किया और विधानसभा उपचुनाव जीतकर खुद भी विधायक बन गयीं।

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हम आपको बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन के एक मामले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। खास बात यह है कि हेमंत सोरेन के वरिष्ठ वकील अरुणाभ चौधरी ने कहा, ‘‘अदालत ने कहा है कि प्रथम दृष्टया, वह दोषी नहीं हैं और जमानत पर रिहाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा कोई अपराध किए जाने की कोई आशंका नहीं है।’’ हम आपको यह भी बता दें कि हेमंत सोरेन जब जेल से बाहर निकले तो बड़ी संख्या में झामुमो के समर्थक वहां मौजूद थे और उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के समर्थन में नारेबाजी की। जेल से रिहा होने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन ने दावा किया कि उन्हें धनशोधन के झूठे मामले में फंसाया गया और उन्हें लगभग पांच महीने जेल में बिताने के लिए मजबूर किया गया। हम आपको यह भी बता दें कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने भी हेमंत सोरेन का अदालत में पक्ष रखा था और पूर्व मुख्यमंत्री की जमानत के लिए दलील पेश करते हुए कहा था कि केंद्रीय एजेंसी ने उन्हें एक आपराधिक मामले में झूठा फंसाया है। हालांकि हेमंत सोरेन की जमानत याचिका का विरोध करते हुए ईडी ने आरोप लगाया था कि उन्होंने राज्य की राजधानी में बड़गाम अंचल में 8.86 एकड़ जमीन ‘‘अवैध रूप से’’ हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री के अपने पद का दुरुपयोग किया था।

ईडी ने दावा किया कि जांच के दौरान सोरेन के मीडिया सलाहकार अभिषेक प्रसाद ने स्वीकार किया था कि पूर्व मुख्यमंत्री ने उन्हें उक्त भूखंड के स्वामित्व में बदलाव करने के लिए आधिकारिक आंकड़ों से छेड़छाड़ करने का निर्देश दिया था। ईडी ने दावा किया था कि भूखंड पर जब कब्जा किया जा रहा था तब उसके असली मालिक राजकुमार पाहन ने शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन उसपर कभी कार्रवाई नहीं हुई। हम आपको याद दिला दें कि हेमंत सोरेन को ईडी ने कई बार तलब किया था, जिसके बाद उनसे उनके आवास पर पूछताछ की गई और फिर 31 जनवरी को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

बहरहाल, राज्य में बनी नई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा का मानना है कि चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में जनता झारखंड मुक्ति मोर्चा को उखाड़ फेंकेगी। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा, "झारखंड में जो सरकार चल रही है उसमें आम लोग परेशान हैं, एक भी वादे पूरे नहीं किए गए हैं, बिजली की व्यवस्था सही नहीं है।'' उन्होंने कहा कि कानून की व्यवस्था भी आप देखें...अब प्रदेश में जनता ने तय किया है कि यहां भाजपा की सरकार बनेगी।

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