Delimitation Bill 2026 | क्या लोकसभा में पास होगा परिसीमन बिल? DMK ने रखीं 3 शर्तें, समर्थन मिलते ही NDA के करीब होगा बहुमत का आंकड़ा

By रेनू तिवारी | Aug 07, 2026

संसद में बहुचर्चित और विवादित 'परिसीमन संशोधन विधेयक' (Delimitation Bill) को लेकर देश की राजनीति में बड़ी हलचल देखने को मिल रही है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की अगुवाई वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) केंद्र की मोदी सरकार को इस बिल पर समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। हालाँकि, पार्टी सूत्रों के अनुसार इसके लिए केंद्र सरकार को DMK की 3 प्रमुख शर्तें माननी होंगी।

दूसरी शर्त यह है कि स्टालिन की पार्टी ने मांग की है कि सभी राज्यों के लिए लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की एकसमान बढ़ोतरी की जाए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अप्रैल में निचले सदन में बिल पेश करते समय मौखिक रूप से इसका भरोसा दिया था।

इन दो शर्तों के अलावा, DMK यह भी चाहती है कि केंद्र सरकार नए कानून के साथ-साथ सभी राज्यों के बदले हुए लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की पूरी सूची भी जारी करे।

पार्टी सूत्रों ने इंडिया टीवी को बताया कि अगर केंद्र सरकार इन तीनों शर्तों को मानने का फैसला करती है, तो DMK परिसीमन बिल का समर्थन करने को तैयार है। हालांकि, इस बारे में अंतिम फैसला पार्टी का नेतृत्व बिल के फाइनल ड्राफ्ट और उसके सभी प्रावधानों की जांच-पड़ताल करने के बाद ही लेगा।

अब तक DMK ने परिसीमन बिल का पुरजोर विरोध किया है और इसे राज्यों, खासकर दक्षिण के राज्यों के हितों के खिलाफ बताया है। हालांकि, जब से कांग्रेस ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की 'तमिलगा वेट्री कड़गम' (TVK) के साथ गठबंधन किया है और DMK के साथ उसका गठबंधन खत्म हुआ है, तब से ऐसी अटकलें तेज हो गई हैं कि स्टालिन की पार्टी इस कानून का समर्थन कर सकती है।

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भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) परिसीमन बिल को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इस बिल के पास होने से लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी, ताकि महिला आरक्षण कानून को लागू किया जा सके। जब यह बिल पहले अप्रैल में पेश किया गया था, तो इसे 298 वोट मिले थे। इसमें जगनमोहन रेड्डी की YSRCP के चार सदस्यों, ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (ZPM) के एक सदस्य और एक निर्दलीय सांसद का समर्थन मिला था। हालाँकि, अगर वोटिंग के समय सदन में सभी 540 सदस्य मौजूद हों, तो इसे पास कराने के लिए 360 वोटों की ज़रूरत होगी।

अभी लोकसभा में NDA के पास 319 सदस्य हैं। यह संख्या तब हुई जब शिवसेना (UBT) के सात सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए और उन्हें नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया (NCPI) या बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेताओं के 20 विधायकों का समर्थन मिला। DMK के पास 22 लोकसभा सदस्य हैं और उनके समर्थन से NDA की ताकत 341 हो जाएगी।

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काफी चर्चा है कि आठ सांसदों वाली NCP(SP) भी इस बिल का समर्थन कर सकती है; हालाँकि, इस बारे में अभी कोई साफ़ जानकारी नहीं है। और अगर YSRCP और ZPM फिर से बिल का समर्थन करते हैं, तो NDA की ताकत 354 (स्पीकर को छोड़कर) हो जाएगी।

इससे पहले यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल (Delimitation Bill) के लिए 16 से 18 अगस्त तक विशेष सत्र बुला सकती है। हालाँकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने समाचार एजेंसी PTI को बताया, "महिला आरक्षण और परिसीमन बिलों पर 16 से 18 अगस्त के बीच कोई विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं है।"

संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होगा।

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