हीटवेव रोक देगी भारत की AI क्रांति? क्या अरबों डॉलर की योजना पर लगेगा ब्रेक

By अभिनय आकाश | Jun 19, 2026

एक तरफ जहां भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित करने की होड़ में है, वहीं एक नए वैश्विक आकलन ने चेतावनी दी है कि देश के नए और आधुनिक डेटा सेंटर्स पर जलवायु से जुड़ी आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। जलवायु जोखिम का आकलन करने वाली कंसल्टेंसी फर्म 'XDI' (क्रॉस डिपेंडेंसी इनिशिएटिव) द्वारा बुधवार को जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक दुनिया का ध्यान मुख्य रूप से डेटा सेंटर्स की ऊर्जा और पानी की भारी जरूरतों पर ही केंद्रित रहा है। लेकिन भीषण गर्मी और खराब मौसम के कारण बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान जैसे भौतिक जलवायु जोखिम इस सेक्टर के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहे हैं। '2026 ग्लोबल एनालिसिस ऑफ प्लान्ड डेटा सेंटर्स फॉर फिजिकल क्लाइमेट रिस्क एंड रेजिलिएंस' नामक इस रिपोर्ट में दुनियाभर में बनने वाले 2,595 प्रस्तावित डेटा सेंटर्स का विश्लेषण किया गया है। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य इन डेटा सेंटर्स पर जलवायु परिवर्तन से होने वाले सीधे नुकसान, भीषण गर्मी की वजह से इनके संचालन में आने वाली रुकावटों और बिजली, पानी व परिवहन नेटवर्क जैसे बाहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के ठप होने से पैदा होने वाले बड़े खतरों का सटीक आकलन करना है।

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यह रिपोर्ट एक बड़े ग्लोबल ट्रेंड की ओर इशारा करती है। अभी दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया में ऐसे डेटा सेंटर्स का अनुपात सबसे ज़्यादा है, जिनके लिए जलवायु से जुड़ा बड़ा ख़तरा है। दक्षिण एशिया में, मौजूदा हालात में 12% प्रस्तावित सेंटर्स को पहले ही ज़्यादा जोखिम वाला माना गया है; और अनुमान है कि सदी के अंत तक, ज़्यादा उत्सर्जन वाले हालात में यह जोखिम तीन गुना से भी ज़्यादा हो जाएगा। गर्मी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक लगती है। भारत, ब्राज़ील, मेक्सिको, इंडोनेशिया और स्पेन जैसे देशों में अत्यधिक तापमान के कारण कामकाज में रुकावट आने का जोखिम सबसे ज़्यादा है। XDI के अनुसार, इन देशों में जिन सुविधाओं का आकलन किया गया, उनमें से 75% से ज़्यादा गर्मी से जुड़ी रुकावटों के मामले में ज़्यादा जोखिम वाली श्रेणी में आती हैं। साथ ही, जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ेगा, यह जोखिम और भी बढ़ने की आशंका है। बाढ़ या तूफ़ान से बुनियादी ढांचे को भौतिक नुकसान हो सकता है, लेकिन इसके उलट, लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी रहने से उपकरणों की कार्यक्षमता कम हो सकती है, कूलिंग की लागत बढ़ सकती है, बिजली आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है और सेवाओं में रुकावट का जोखिम बढ़ सकता है।

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