टैक्स, टैरिफ और बैन, धमकी और दोस्ती वाला ट्रंप का रवैया क्या रूस-चीन-ईरान को अमेरिका के करीब ला पाएगा?

By अभिनय आकाश | Jan 23, 2025

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली और धड़ाधड़ वो फैसले भी लिए जा रहे हैं। 24 घंटे में रूस और यूक्रेन की जंग खत्म करवाने का दावा करने वाले ट्रंप के रूस और उसके राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति नीतियों और बयानबाजी पर अब दुनिया की निगाहें जा टिकी हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कहा कि वह रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से कभी भी मिलने को तैयार हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि अगर रूस, यूक्रेन के मुद्दे पर बातचीत के लिए आगे नहीं आता है तो रूस पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। वहीं चीन को लेकर भी ट्रंप का रवैया कभी टैरिफ लगाने की धमकी देकर आर पार वाला तो कभी अपनी टीम को जिनपिंग संग मीटिंग तय करने के लिए कहने के साथ नरम गरम वाला नजर आता है। कुल मिलाकर कहें तो रूस हो या चीन या फिर भारत ट्रंप के कदमों पर सभी की निगाहें परस्पर बनी हुई है। 

ट्रंप ने कहा कि संघर्ष कभी शुरू ही नहीं होना चाहिए था। मुझे लगता है आपके पास एक सक्षम राष्ट्रपति नहीं था, अगर होता तो युद्ध नहीं होता। अगर मैं राष्ट्रपति होता तो यूक्रेन में युद्ध कभी नहीं होता। रूस कभी यूक्रेन में नहीं जाता। पूतिन और मेरे बीच बहुत अच्छी और मजबूत समझ थी। ऐसा कभी नहीं होता। उन्होंने जो बाइडेन का अनादर किया। उन्होंने लोगों का भी अनादर किया। वह स्मार्ट हैं। उन्होंने कहा, 'इसके अलावा, वेस्ट एथिया में भी यह सब कभी नहीं होता क्योंकि ईरान काफी कमजोर था। एक सवाल पर ट्रंप ने कहा कि वह पुतिन से कभी भी मिलने के लिए तैयार हैं। क्या अमेरिका, यूक्रेन को हथियार भेजना जारी रखेगा? इस पर ट्रंप ने कहा कि हम मामले को देखेंगे। हम जेलेंस्की से बात कर रहे हैं। हम बहुत जल्द राष्ट्रपति पूतिन से बात करने जा रहे हैं।

पुतिन को लेकर ट्रंप का रवैया 

पुतिन के साथ ट्रम्प के रिश्ते में लंबे समय से प्रशंसा और व्यावहारिकता का मिश्रण देखा गया है। फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर चढ़ाई करने से पहले तक ट्रंप ने पुतिन के कार्यों को प्रतिभाशाली और समझदार बताते रहे थे। क्ले ट्रैविस एंड बक सेक्स्टन शो पर बोलते हुए, ट्रम्प ने यूक्रेन के कुछ हिस्सों के लिए पुतिन की स्वतंत्रता की घोषणा की प्रशंसा की और इसे एक शानदार कदम बताया। पुतिन ने यूक्रेन के एक बड़े हिस्से को स्वतंत्र घोषित किया था। उस समय, ट्रम्प की टिप्पणियों की तीखी आलोचना हुई थी। आलोचकों ने तर्क दिया कि पुतिन के लिए ट्रम्प के गर्मजोशी भरे शब्द विरोधियों के प्रति उदारता दिखाते हुए पारंपरिक गठबंधनों को कम करने के पैटर्न को दर्शाते हैं। पुतिन की यह प्रशंसा ट्रम्प की पहले की बयानबाजी के अनुरूप थी। अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अक्सर रूसी नेता के साथ अपने सकारात्मक संबंधों पर जोर दिया था। 

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चीन को लेकर क्या रवैया रहेगा

ट्रंप की चीन नीति को लेकर ट्रंप की क्या होगी। चीन नीति क्या रहती है, यह अहम बात होगी। चीन को लेकर वह अलग- अलग बातें करते रहे हैं। कभी वह उससे जियो-पॉलिटिकल या आर्थिक चिंताओं की बात करते हैं तो कभी शी चिनफिंग के साथ डील करने की। साथ ही, वह हिंद-प्रशांत को लेकर पिछली सरकार की नीतियों पर सवाल भी उठा चुके हैं।  ट्रंप ने अपनी सरकार में कई चीन विरोधियों को जगह दी है, लेकिन इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो चीन को लेकर संतुलित या पॉजिटिव रवैया रखते हैं। ट्रंप का चीन को लेकर क्या रुख रहता है, उसका भारत पर असर होगा। उसकी वजह अमेरिका की चीन नीति में भारत की भूमिका है। फिर चीन का रुख क्या रहता है। चीन को की बैलेंस नीति करने के लिए दूसरे देशों क्या होती। 

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ईरान पर और सख्त होगा अमेरिका?

ईरान को लेकर ट्रंप की नीति पर हो सकती है। ट्रंप सरकार में कुछ लोग हैं, जिन्होंने ईरान पर अधिकतम राजनयिक और आर्थिक दबाव डालने की बात कही है। अमेरिका या इस्राइल की और से सैन्य कार्रवाई की बात भी करते रहे है ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोका जा सके। कुछ लोग ऐसे किसी दखल के खिलाफ हैं और ट्रंप ने भी चुनाव प्रचार के दौरान ऐसे युद्धों से दूर रहने की बात कही थी। ऐसी भी अटकलें लग रही हैं कि वह ईरान के साथ कोई डील कर सकते हैं। इस मामले में अमेरिका की नीति का भारत पर असर होगा क्योंकि वह इस क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता। 

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