अब 100% Ethanol पर चलेंगी गाड़ियां? सरकार ने Motor Vehicle Rules में बदलाव का Draft किया जारी

By Ankit Jaiswal | Apr 29, 2026

देश में ईंधन नीति और वाहन नियमों को लेकर एक अहम पहल सामने आई है, जो आने वाले समय में परिवहन क्षेत्र की दिशा बदल सकती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है। बता दें कि इस मसौदे का उद्देश्य बढ़ते इथेनॉल मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों को ध्यान में रखते हुए नियमों को अपडेट करना है, ताकि भविष्य की जरूरतों के अनुसार व्यवस्था तैयार की जा सके।

मसौदे में ईंधन की परिभाषा और उत्सर्जन मानकों में भी बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं। पेट्रोल वाहनों के लिए ईंधन का विवरण अब पुराने प्रारूप से बदलकर ई 10 और ई 20 के अनुरूप किया जाएगा, ताकि वर्तमान राष्ट्रीय मानकों के साथ तालमेल बैठाया जा सके। इसके अलावा हाइड्रोजन ईंधन की श्रेणी में भी संशोधन किया गया है, जहां पुराने शब्दों की जगह अब अद्यतन शब्दावली को शामिल किया गया है। वहीं बायोडीजल के संदर्भ में भी विस्तार करते हुए बी 10 से बढ़ाकर बी 100 तक के विकल्प को शामिल करने का प्रस्ताव है, जो वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देने की नीति को दर्शाता है।

एक और महत्वपूर्ण बदलाव के तहत कुछ श्रेणियों में वाहनों के कुल वजन की सीमा 3000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3500 किलोग्राम करने का प्रस्ताव दिया गया है, जिससे उत्सर्जन नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाया जा सके। बता दें कि इस मसौदे पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 30 दिनों तक सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यह पहल सरकार की उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना और स्वदेशी व स्वच्छ ऊर्जा विकल्पों को बढ़ावा देना है। ब्राजील और अमेरिका जैसे देशों में पहले से ही ई 85 और ई 100 जैसे ईंधनों का उपयोग हो रहा है, खासकर फ्लेक्स फ्यूल वाहनों में। भारत में भी इस दिशा में वाहन निर्माताओं और तेल कंपनियों के साथ बातचीत जारी है, ताकि इंजन की अनुकूलता, वितरण व्यवस्था और लागत जैसे पहलुओं का आकलन किया जा सके।

सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी पहले भी इथेनॉल के व्यापक उपयोग की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में भारत 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण की दिशा में आगे बढ़ सकता है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और आयात पर निर्भरता घटेगी।

आम वाहन खरीदारों के लिए फिलहाल इस मसौदे का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वर्तमान में ई 20 ही मानक ईंधन बना हुआ है। लेकिन यह संकेत जरूर है कि आने वाले समय में फ्लेक्स फ्यूल वाहन अधिक आम हो सकते हैं और लोगों को ईंधन के विकल्प भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, इसके लिए जरूरी ढांचा विकसित होने तक व्यापक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

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