By दिव्यांशी भदौरिया | Oct 09, 2026
हर साल 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। गौरतलब है कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का जरुरी हिस्सा बन चुका है। जब हम सभी सुबह उठते हैं, तो सबसे पहले फोन चेक करना, दिनभर स्क्रीन पर काम करना और रात को सोने से पहले सोशल मीडिया चलाना हमारी आदत बन गई है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन को घंटों तक इस्तेमाल करना, नींद न पूरी होना और हर समय ऑनलाइन रहने का प्रभाव हमारे दिमाग पर असर जरुर डालता है।
डिजिटल दौर में दिमाग को हेल्दी कैसे रखें?
अगर आप डिजिटल दुनिया से पूरी तरह से दूर रहना चाहते हैं, तो लेकिन फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल किस तरह करते हैं, इस पर ध्यान देना जरुरी है। लगातार नोटिफिकेशन चेक करना, देर रात तक रील्स देखने और काम के बीच आराम न करना हमारी नींद और ध्यान लगाने की क्षमता पर बुरा असर डाल सकता है।
असल में मेंटल हेल्थ का संबंध केवल दिमाग से नहीं बल्कि दिल, खून की नसों, नींद और हमारी रोजाना की आदतों से भी है। इसलिए दिमाग को हेल्दी रखने के लिए स्क्रीन टाइम के साथ-साथ अपनी पूरी दिन की रुटीन पर भी ध्यान देना चाहिए।
ऑनलाइन रहने का दबाव दिमाग को कैसे प्रभावित करता है?
खासकर ऑफिस के मैसेज, सोशल मीडिया की लगातार अपडेट और घर की जिम्मेदारियों के बीच कई लोग तनाव से घिर जाते हैं। ऐसे में तनाव लंबे समय तक बना रहता है। काम के बीच आराम करना, अच्छी नींद लेना और तनाव को कम करना भी काफी जरुरी है।
मेंटल हेल्थ के लिए इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
अगर आप डिजिटल स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करते हैं, तो आपके आंखों में थकान, गर्दन में दर्द और सिरदर्द हो सकता है, लेकिन हर परेशानी की वजह स्क्रीन ही हो, यह जरुरी नहीं है।
लगातार बढ़ता सिरदर्द
अचानक चक्कर आना,
धुंधला दिखाई देना
याददाश्त से जुड़ी परेशानी होना
हाथ-पैर में कमजोरी होना
बोलने में दिक्कत महसूस होना
अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकना
यदि आपको ये सभी लक्षण नजर आएं, तो डॉक्टर को जरुर दिखाएं। ये स्ट्रोक के लक्षण हो सकते हैं।
डिजिटल युग में दिमाग को हेल्दी रखने के तरीके
- रात में मोबाइल चलाने का समय कम करें और सोने-जागने का समय फिक्स कर लें।
- हर घंटे कुछ देर के लिए स्क्रीन से नजर हटाएं और थोड़ा दूर चलें।
- रोजना पैदल चलें, अपने क्षमता के अनुसार करीब 30 मिनट टहलने की कोशिश करें।
- वर्क और आराम के बीच बैलेंस बनाए रखें। जरुरत पड़ने पर किसी भी एक्सपर्ट से बात जरुर करें।
- इनका बढ़ा हुआ लेवल दिमाग की नसों को नुकसान पहुंचा सकता है।
- हर समय ऑनलाइन रहने से बचना जरुरी है। अपने फोन के नोटिफिकेशन की सीमित करें और दिन में कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताएं।