World Smile Day: तनाव से मुक्ति का मंत्र है मुस्कान

By डॉ. शंकर सुवन सिंह | Oct 07, 2022

दया शब्द को कई नामों से जाना जाता हैं जैसे करुणा, सहानुभूति, अनुकंपा, कृपा, रहम, आदि। परिस्थिति जन्य की गई सेवा दया कहलाती है। मनोस्थिति जन्य की गई सेवा करुणा कहलाती है। करुणा स्वभाव गत होती है। जिस इंसान में करुणा है उसके लिए बाहर की कोई भी परिस्थिति उस पर प्रभाव नहीं डाल पाती। सामान्य भाषा में कहें तो करुणा का ही प्रतिरूप है दया। एक मनोस्थति जन्य और दूसरा परिस्थति जन्य है। दया परिस्थति पर निर्भर करती है। करुणा मन की स्थिति पर निर्भर करती है। करुणावान व्यक्ति दयालु भी होता है। दयालु व्यक्ति करुणामयी हो ऐसा जरुरी नहीं। महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद आदि महापुरुष करुणामयी थे। इनमे दयालुता भी थी। हिन्दुओं के पवित्र ग्रन्थ रामचरित मानस के लेखक गोस्वामी तुलसीदास जी ने दया को धर्म का मूल कहा था। दया और धर्म एक दूसरे के पूरक हैं। जहां दया है वहाँ धर्म है। धर्म रूपी मकान दया रूपी स्तम्भ पर टिका हुआ है। बिना दया के धर्म की कल्पना व्यर्थ है। दया, प्रेम का रूप है। किसी के चेहरे पर मुस्कान लाना, किसी की मदद करना दयालुता का ही प्रतीक है। आज कल लोगों का जीवन दौड़ भाग के चलते तनाव में हैं। लोगों में प्रेम का न होना तनाव का सबसे बड़ा कारण है। 

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प्रत्येक वर्ष, अक्टूबर महीने के प्रथम सप्ताह के शुक्रवार को विश्व मुस्कान दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2022 में 7 अक्टूबर को विश्व मुस्कान दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष विश्व मुस्कान दिवस की थीम/विषय है- दयालुता का कार्य करें, एक व्यक्ति को मुस्कुराने में मदद करें (डू एन एक्ट ऑफ़ काइंडनेस, हेल्प वन पर्सन स्माइल)। प्रेम में ही दयालुता की उत्पत्ति होती है। प्रेम में करुणा का वास होता है। प्रेम में आस्था का वास होता है। प्रेम एक शाश्वत सत्य है। राधा और कृष्ण का प्रेम शाश्वत है। प्रेम आस्तिकता का प्रतीक है। द्वेष नास्तिकता का प्रतीक है। आस्तिकता में सकारात्मकता होती है। नास्तिकता में नकारात्मकता होती है। कहने का तात्पर्य यह है कि जहां दया और करुणा है वहां प्रेम है। जहाँ प्रेम है वहाँ ईश्वर का वास है। प्रेम आनंद देता है। द्वेष दुःख देता है। मुस्कुराता हुआ चेहरा आनंद का द्योतक है। मुरझाया हुआ चेहरा दुःख का द्योतक है। एक आनंदित व्यक्ति ही दूसरों के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है और दूसरों की मदद कर सकता है। किसी व्यक्ति को उसकी पूर्ववत स्थिति से बेहतर स्थिति में लाना ही मदद कहलाता है। जिस व्यक्ति की हम मदद कर रहे हैं उसको भी यह एहसास दिलाना होगा कि वो भी किसी की मदद कर सकता है। लोगो की मदद करना और उनके चेहरे पर मुस्कान लाना ही तनाव से मुक्ति दिलाता है। तनाव से सामाजिक असंतुलन पैदा होता है जिसके फलस्वरूप समाज में अशांति फैलती है। तनाव, प्रेम का शत्रु है। मुस्कान, प्रेम की जननी है। मुस्कान रूपी देवकी ने तनाव रूपी कंस (राक्षस) को मारने के लिए प्रेम रूपी कृष्ण को पैदा किया। भगवान् कृष्ण प्रेम के प्रतीक थे। मुस्कराहट के भाव से तनाव पर विजय प्राप्त की जा सकती है। मुस्कान, दयालुता की इकाई है। मुस्कराहट और दयालुता, सामाजिक संतुलन रूपी सेतु के दो छोर हैं। एक मुस्कान बड़ी से बड़ी कठनाई को सरल बनाने में कारगर है। मुस्कराहट से चिंता के काले बादल छंट जाते हैं। जब होंठों पर हंसी फूटती है तब बंजर जिंदगी लहलहा उठती है। अतएव हम कह सकते हैं कि मुस्कान, तनाव से मुक्ति का मंत्र है।

- डॉ. शंकर सुवन सिंह

वरिष्ठ स्तम्भकार एवं विचारक

असिस्टेंट प्रोफेसर,

कृषि विश्वविद्यालय, प्रयागराज (यूपी)

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