By अनन्या मिश्रा | Mar 19, 2026
दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में उगादि का काफी ज्यादा महत्व है। इसको तेलुगु नववर्ष का भी प्रतीक माना जाता है। दक्षिण भारत का यह पर्व नई शुरूआत, समृद्धि और आध्यात्मिक नवजीवन का प्रतीक है। इस बार 19 मार्च 2026 को उगादि का पर्व मनाया जा रहा है। जोकि हिंदू चंद्र पंचाग के मुताबिक यह चैत्र महीने की शुरूआत का भी प्रतीक है। भक्त परंपराओं, रीति-रिवाजों, पारंपरिक भोजन, प्रार्थनाओं और पारिवारिक मिलन के साथ नए साल का भव्य स्वागत करते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को उगादि पर्व की शुरूआत का प्रतीक है। 19 मार्च 2026 की सुबह 06:52 मिनट पर प्रतिपदा तिथि की शुरूआत हुई। वहीं 20 मार्च 2026 की पूर्वाह्न 04:52 मिनट तक इस तिथि की समाप्ति होगी।
दक्षिण भारत के ज्यादार हिस्सों में विशेषरूप से तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में उगादि के पर्व का खास महत्व होता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान ब्रह्मा ने ब्रहांड की रचना की थी। इस कारण उगादि को नई योजनाओं, नई शुरूआत और आध्यात्मिक विकास का शक्तिशाली दिन माना जाता है।
बता दें कि इस पर्व की शुरूआत सुबह-सुबह पारंपरिक अनुष्ठानों से की जाती है। जोकि कृतज्ञता, शुद्धिकरण और घर में समृद्धि के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर तेल से स्नान किया जाता है, जिससे मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं। फिर घर को ताजे फूल और प्रवेश द्वार को आम के पत्तों के तोरण से सजाया जाता है। वहीं महिलाएं घर में रंगोली बनाती हैं। इस खास मौके पर घरों में पारंपरिक पकवान बनते हैं।