हुनर दिखाने का समय आ गया...अमेरिका से टकराने के लिए शी जिनपिंग को पड़ी अलीबाबा वाले जैक मा की जरूरत

By अभिनय आकाश | Feb 20, 2025

तुलसी नर का क्या बड़ा, समय बड़ा बलवान । भीलन लूटी गोपियाँ, वही अर्जुन वही बाण । तुलसीदास जी कहते हैं कि मनुष्य बड़ा/छोटा नहीं होता वास्तव में यह उसका समय ही होता है जो बलवान होता है। जैसे एक समय था जब महान धनुर्धर अर्जुन ने अपने गांडीव बाण से महाभारत का युद्ध जीता था और एक ऐसा भी समय आया जब वही भीलों के हाथों लुट गया और वह अपनी गोपियों का भीलों के आक्रमण से रक्षण भी नहीं कर पाए। आम इंसान हो या फिर कोई भी बहुत बड़ा उद्दोगपति इससे अछूता नहीं रहा। एक समय तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को फूटी आंख नहीं सुहाने वाले जैक मा का साथ अब अमेरिका से टेक वॉर जीतने के लिए ले रहे हैं। चीनी अरबपति जैक मा की दोबारा उपस्थिति ने बीजिंग द्वारा निजी क्षेत्र पर दबाव कम करने की अटकलें तेज कर दिया है। लेकिन असली कहानी इससे भी अलग है। अलीबाबा, मा की कंपनी, चीन के निजी क्षेत्र की सफलता का एक शक्तिशाली प्रतीक बनी हुई है।

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बैठक में चीन के सभी बड़े टेक टायकून्स शामिल

बैठक में जैक मा के अलावा टेक कंपनी टेंसेन्ट के संस्थापक पॉनी मा भी मौजूद थे। इनके अलावा हुआवेई के संस्थापक रेन झेंगफेई, श्याओमी के ली जुआन, एआई कंपनी डीपसीक के लियांग वेनफेंग और ईवी कंपनी बीवाईडी के संस्थापक वांग चुआनफू भी शामिल हुए। जिनपिंग बोले कि हुनर दिखाने का समय आ गया बैठक में शी जिनपिंग ने कहा, यह सही समय है जब निजी कारोबार और उद्यमी अपना टैलेंट दिखाएं। इस बैठक मंले उन्होंने निजी कंपनियों को समर्थन देने की बात कही। हालांकि, उन्होंने फिर संकेत दिया गया कि कंपनियां पार्टी की नीतियों के साथ तालमेल बैठाकर ही काम करें। उन्होंने टेक सेक्टर में रिसर्च के महत्व को दोहराया।

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2020 में चीन की जिनपिंग सरकार ने बिजनेसमैन जैक मा की कंपनी अलीबाबा पर ₹18 हजार करोड़ का जुर्माना लगाया था। उनकी फिनटेक वेंचर एंट ग्रुप के 3.21 लाख करोड़ के आईपीओ भी रोक दिए थे। इसके बाद वे गायब से हो गए थे। इसके अलावा राष्ट्रपति जिनपिंग ने कई और उद्यमियों पर क्रैकडाउन किया था। लेकिन अब वे यू-टर्न लेते दिख रहे हैं। दो दिन पहले बीजिंग में हुई हाई प्रोफाइल समिट में जिनपिंग ने जैक मा और चीन के कई टेक टायकून्स से मुलाकात की। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ट्रम्प नीति का असर है। जिनपिंग अब टेक सेक्टर को दोबारा मजबूती देना चाहते ते हैं, ताकि अमेरिका के साथ उनकी टेक वॉर में पिछड़ने की संभावना न रहे।

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