By अभिनय आकाश | Oct 01, 2026
एनआईए की एक विशेष अदालत ने अलगाववादी नेता यासीन मलिक और छह अन्य लोगों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने हवाला चैनलों के ज़रिए पाकिस्तानी और विदेशी फंड का इस्तेमाल जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों को फाइनेंस करने के लिए किया। 9 सितंबर को जारी और गुरुवार को उपलब्ध कराए गए एक आदेश में, अदालत ने कहा कि प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 3 के तहत अपराध (जिसके लिए धारा 4 के तहत सज़ा का प्रावधान है) के लिए सभी सात आरोपियों के खिलाफ़ मज़बूत संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। अदालत ने कहा मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि प्रथम दृष्टया, रिकॉर्ड पर पर्याप्त सामग्री मौजूद है जिसके आधार पर सभी सात आरोपियों के खिलाफ़ मज़बूत संदेह पैदा होता है।
ED का मामला यह है कि अलगाववादी एजेंडे को बढ़ावा देने और देश-विरोधी गतिविधियों में मदद करने के लिए, कथित तौर पर नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन से कैश कूरियर के ज़रिए हुर्रियत नेताओं (जिनमें मलिक भी शामिल हैं) तक पैसे पहुंचाए गए। एजेंसी ने वताली के साथ काम करने वाले अकाउंटेंट-कम-कैशियर गुलाम मोहम्मद भट से बरामद सबूतों का भी सहारा लिया। कथित तौर पर इन दस्तावेज़ों से पता चला कि मलिक, शब्बीर शाह और मसरत आलम को 2015-16 फाइनेंशियल ईयर के दौरान वताली के ज़रिए विदेशी चंदा मिला था। जांच में मलिक से जुड़े कुछ ईमेल भी मिले। ED के मुताबिक, इन ईमेल से पता चला कि उसने "आज़ादी की लड़ाई" के नाम पर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी, अलगाववादी और गैर-कानूनी गतिविधियों के लिए विदेश से फंड जुटाने का एक नेटवर्क बनाया था। एजेंसी का आरोप है कि इस फंड का इस्तेमाल JKLF को बनाए रखने और अलगाववादी हिंसा को बढ़ाने के लिए किया गया था। ED की जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि मलिक को 2015-16 के दौरान वटाली के ज़रिए ₹15 लाख और मिले, जिससे उसे कथित तौर पर मिली कुल रकम ₹30.75 लाख हो गई। NIA ने अपनी दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में आरोप लगाया कि मलिक को 2013 में सऊदी अरब से ₹15.75 लाख मिले थे। ED ने इन रकमों को अपराध से हुई कमाई माना, जो कथित तौर पर तय अपराधों से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों से हासिल की गई थी।